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Ajmer: युद्ध से पहले पृथ्वीराज आते थे मंदिर में दर्शन करने, चौहान वंश की कुलदेवी हैं मां चामुंडा, जानें खासियत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 03 Oct 2024 11:54 AM IST
सार

अजमेर के फायसागर रोड स्थित बोराज गांव की पहाड़ी पर विराजमान चामुंडा माता का मंदिर है। जहां पर साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यह लाखों लोगों का आस्था का केंद्र है। बता दें कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने इस मंदिर की स्थापना की थी और वे स्वयं यहां पूजा अर्चना किया करते थे।

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Chamunda Mata Temple is the family deity of Chauhan dynasty in ajmer
चामुंडा माता का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

अजमेर के फायसागर रोड स्थित बोराज गांव की पहाड़ी पर विराजमान चामुंडा माता का मंदिर है। जहां पर साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यह लाखों लोगों का आस्था का केंद्र है। बता दें कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने इस मंदिर की स्थापना की थी और वे स्वयं यहां पूजा अर्चना किया करते थे।


 
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Chamunda Mata Temple is the family deity of Chauhan dynasty in ajmer
पूजा करते पुजारी - फोटो : अमर उजाला

1160 वर्ष पूर्व हुई थी मंदिर की स्थापना
मंदिर के पुजारी मदन रावत ने बताया कि मंदिर की स्थापना 1160 वर्ष पूर्व हुई थी। तब से लेकर आज तक चामुंडा माता की पूजा अर्चना नित्य होती है। मंदिर प्रांगण में गंगा मैया, भगवान भोलेनाथ, हनुमान जी और भैरव बाबा का भी मन्दिर है। गंगा मैया के मंदिर में जल का एक छोटा सा कुंड है, जिसका पानी कभी भी समाप्त नहीं होता। इस कुंड के जल को गंगा के समान पवित्र माना जाता है।

पृथ्वीराज चौहान की है कुलदेवी 
चामुंडा माता मंदिर को सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुल देवी माना जाता है। स्थानीय लोग चामुंडा माता को चामुंडा माई कह कर पुकारते है। कहा जाता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान माता के अनन्य भक्त थे। यहीं, वह स्थान है जहां माता ने उन्हें दर्शन दिये थे। बोराज गांव से मंदिर के सेवादार पूजा अर्चना किया करते है।

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Chamunda Mata Temple is the family deity of Chauhan dynasty in ajmer
मां चामुंडा - फोटो : अमर उजाला
पृथ्वीराज चौहान इस चामुंडा माता मंदिर युद्ध का आशीर्वाद लेने के लिए युद्ध में जाने से पहले माता का आशीर्वाद लेने इसी चामुंडा माता मंदिर में जाते थे। यह ऐतिहासिक मंदिर अजमेर के एक झील फॉयसागर के पास में पहाड़ी के ऊपर स्थित है, जहां तक गाड़ी भी जाती है और ऊंचाई से बहुत ही सुंदर दिखाई देता है। पहाड़ी पर बने इस मंदिर को 1000 से भी ज्यादा वर्ष बीत चुके हैं ।
Chamunda Mata Temple is the family deity of Chauhan dynasty in ajmer
चौहान वंश की कुलदेवी - फोटो : अमर उजाला

बताया जाता हैं कि यहां सम्राट पृथ्वीराज चौहान आते थे और विशेष तौर से युद्ध में जाने से पहले माता का आशीर्वाद लेने के लिए और पूजा-अर्चना करते थे। पृथ्वीराज चौहान से भी पहले का यह मंदिर है जो मंदिर के ऊपर लिखे शिलालेख बताते हैं। मंदिर में एक ऐसा माता गंगा का कुंड है जिसमें पानी कभी समाप्त नहीं होता जितना उसमें से पानी निकालो आ जाता है। मंदिर में महादेव का स्थान भी है। कहा जाता है यहां पर सिर्फ माता का मुख ही बाहर की तरफ है बाकी शरीर धरती माता के अंदर है। यहां बहुत ही धूमधाम से आरती की जाती है नवरात्रा में विशेष तौर से मेला लगता है। कहा जाता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान माता के अनन्य भक्त थे, यही वह स्थान है जहां माता ने उन्हें दर्शन दिये थे। आज भी माना जाता है कि चामुंडा माता मंदिर में आने वाले हर भक्त के दुख दर्द को हर लेती है और मनवांछित फल प्रदान करती है।

कुंड का पानी नहीं होता खत्म 
मंदिर प्रांगण में गंगा मैया, भगवान भोलेनाथ, हनुमान जी और भैरव बाबा का भी मन्दिर है । गंगा मैया के मंदिर में जल का एक छोटा सा कुंड है, जिसका पानी कभी भी समाप्त नहीं होता, इस कुंड के जल को गंगा के समान पवित्र माना जाता है। आज शारदीय नवरात्रि के पहले दिन चामुंडा माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और नवरात्रि में माता रानी का विशेष श्रृंगार कर उनकी पूजा-अर्चना की गई, आने वाले दिनों में मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा।

अजमेर से विकास टाक की रिपोर्ट

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