राजस्थान सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहा है। पिछले महीने करौली, जोधपुर और इस महीने भरतपुर में हालात तनावपूर्ण हो गए। चार मई 2022 को भी भीलवाड़ा में दो युवकों के साथ मारपीट के बाद माहौल बिगड़ गया था। अब एक बार फिर एक सप्ताह में ही भीलवाड़ा के हालात दोबारा बिगड़ गए हैं। आइए हम आपको जिले में माहौल बिगड़ने की पूरी कहानी बताते हैं।
Inside Story of Bhilwara Tension: आपसी लेनदेन को लेकर हुई युवक की हत्या, जिसने ले लिया सांप्रदायिक रंग
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भीलवाड़ा के भोपालपुरा रोड निवासी ओमप्रकाश तापड़िया का बेटा आदर्श तापड़िया (20 साल) शास्त्री नगर में ही व्यापार करता था। कहा जा रहा है कि आदर्श ने आरोपी पक्ष से पैसे उधार लिए थे। उसने बार-बार उधार चुकाने की बात कही पर उसने आरोपियों को पैसे नहीं दिए। मंगलवार की सुबह आरोपी पक्ष ने पैसे देने के लिए उसपर फिर से दबाव बनाया। जिसके बाद आदर्श ने अपने बड़े भाई को आरोपी पक्ष के पास बातचीत के लिए भेजा। उसके बड़े भाई ने आरोपियों से मुलाकात कर आश्वासन दिया कि उनका पैसा जल्दी ही वापस कर दिया जाएगा।
इसके बाद मामला शांत हो गया लेकिन आरोपी पक्ष ने आदर्श को मंगलवार रात 12 बजे बातचीत के लिए शास्त्रीनगर चौक के ब्रह्माणी स्वीट कॉर्नर के बाहर बुलाया। बातचीत के दौरान आरोपी और आदर्श में जमकर कहासुनी हो गई। इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार दो नाबालिग आरोपियों ने चाकू से वार कर आदर्श को घायल कर दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
कुछ राहगीरों ने खून से लथपथ युवक को सड़क पर पड़े देखा। राहगीर आननफानन में आदर्श को महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वारदात की सूचना पर बड़ी संख्या में लोग अस्पताल के बाहर जमा हो गए। मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
युवक की हत्या की सूचना मिलते ही हिंदू सगंठन सहित कई संगठनों के नेता जिला अस्पताल के बाहर एकत्रित हो गए। इनमें भीलवाड़ा शहर विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी, भाजपा जिला अध्यक्ष लादू लाल तेली, नगर परिषद सभापति राकेश पाठक सहित स्थानीय लोग शामिल रहे।
वहीं मृतक युवक के मामा महेश खोतानी ने न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, वो शव नहीं उठाएंगे। विभिन्न संगठनों ने भी हत्या की निंदा की है और जिला प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
शव उठाने से किया इंकार
वहीं भाजपा ने घटना की निंदा करते हुए हमलावरों की गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग की है। उन्होंने मांग उठाई कि जब तक परिवार को मुआवजे के रूप में 50 लाख रुपये नहीं दिए जाएंगे, शव को नहीं उठाया जाएगा। इसके साथ ही भीलवाड़ा को बंद रख जाएगा।