Asha Bhosle: संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली आशा भोसले वर्सटाइल आवाज के लिए जानी जाती हैं। सुरों की सरताज आशा भोसले कई वर्षो से अपनी आवाज के जादू से हम सभी का मन मोह रही हैं। उन्होंने बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए हैं। संगीत की जब-जब बात होगी, तब-तब आशा भोसले का नाम लिया जाएगा। आशा भोसले संगीतकारों के लिए एक आइडल है। जब भी कोई संगीत की दुनिया में कदम रखता है, वह उनकी तरह गाने का प्रयास करता है और करें भी क्यों न आज भी उनकी आवाज हमारी रूह तक पहुंचती हैं। आशा भोसले ने 'प्यार हमारा अमर रहेगा', 'चंदा मामा दूर के' और 'धूप में निकला न करो रूप की रानी' जैसे एवरग्रीन गानों को अपनी आवाज दी हैं। इसी कड़ी में आइए आशा भोसले के जीवन से जुड़ी बातों को जान लेते हैं।
Asha Bhosle struggle: 90 की उम्र में भी जारी है आशा भोसले के संगीत का सफर, जानें इनके संघर्ष की कहानी
संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली आशा भोसले वर्सटाइल आवाज के लिए जानी जाती हैं। सुरों की सरताज आशा भोसले कई वर्षो से अपनी आवाज के जादू से हम सभी का मन मोह रही हैं।
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आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को हुआ था। अपने सिंगिंग करियर में आशा भोसले ने एक से बढ़कर एक गाने गए है। खास बात ये है कि, उन्होंने महज 10 साल की उम्र से गाना गाने की शुरुआत की थी। फिर वह एक प्रोफेशनल सिंगर बनी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों के लिए गाने गाए। यहीं नहीं आशा भोसले ने कई सारे प्राइवेट एलबम के साथ-साथ सोलो कॉन्सर्ट भी किए हैं।
ऐसा नहीं है कि, उनके पिता मशहूर क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर थे, तो उन्हें करियर बनाने में आसानी हुई। आशा भोसले ने कड़ी मेहनत कर अपना करियर बनाया है। उन्हें बचपन से ही गाने का शौक था। इसी पैशन को फॉलो करते हुए उन्होंने मंजिल को हासिल किया।
आशा भोसले ने अपने परिवार की इच्छा के विरूद्ध जाकर गणपत राव भोंसले से शादी कर ली थी। इस शादी के लिए घरवाले राजी नहीं थे। इसलिए दोनों ने भागकर शादी की थी। उस दौरान वह महज 16 साल की थी, जबकि गणपतराव 31 साल के थे। हालांकि, दोनों की शादी ज्यादा दिनों तक चली नहीं। इसके बाद महान संगीतकार राहुल देव बर्मन के साथ आशा ने दूसरी शादी की, जो उनसे 6 साल छोटे थे। आशा और आर डी बर्मन 1980 में शादी के बंधन में बधें।
आशा भोसले ने पहला गीत फिल्म 'चुनरिया' का 'सावन आया...'गाया था। इसके बाद फिल्म 'नया दौर' आशा के करियर का मुख्य पड़ाव रहा। इसके बाद वह एक के बाद एक सुपरहिट गाने गाती रहीं। 60 और 70 के दशक में आशा भोसले को हिंदी फिल्मों की फेमस एक्ट्रेस हेलन की आवाज समझी जाती थीं। उन्होंने हेलन के लिए 'तीसरी मंजिल' में 'ओ हसीना जुल्फों वाली...' 'कारवां' में 'पिया तू अब तो आजा...', 'मेरे जीवन साथी' में 'आओ ना गले लगा लो ना...' जैसी गीत गाए है। वहीं 90 के गानों में आशा भोसले की अलग धूम थी। उन्होंने 'ले गई ले गई दिल ले गई ले गई', 'शरारा शरारा', राधा कैसे न जले' और फिल्म 'सत्य' का 'सपने में मिलती है'... गाने को अपनी आवाज दी।
मजह 10 साल की उम्र से गाने वाली आशा भोसले के नाम कई उपलब्धियां भी है। हो भई क्यों न उनके संघर्ष को हम सभी सलाम करते है। वहीं उन्हें फिल्म 'उमराव जान' के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। इसके अलावा आशा भोसले को दादा साहेब फाल्के और पद्म विभूषण अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। उन्हें 18 बार फिल्मफेयर के लिए नामांकित किया गया, जिसे उन्होंने 8 बार इसे जीता है। आशा भोसले संगीत जगत के लिए ही नहीं बल्कि हम सभी के लिए एक प्रेरणा है।

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