Azadi Ka Amrit Mahotsav: भारत के इतिहास में कई योद्धा, शूरवीर, क्रांतिकारी हुए जिन्होंने कभी बाहरी आक्रमण से देश की रक्षा की तो कभी राज्य के अंदर ही षड्यंत्रकारियों का सामना किया। ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर ब्रिटिश सरकार तक को लोहा मनवाया। इन शूरवीरों का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है। लेकिन भारतीय इतिहास में कई महिलाओं के नाम भी शामिल हैं, जो योद्धा महिलाओं के तौर पर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवा चुकी हैं। इन योद्धा महिलाओं ने पुरुषों के समान ही राज्य के दुश्मनों से टक्कर ली। कभी महल के अंदर से अपने पतियों व राजाओं का राजतिलक कर युद्ध के लिए भेजा तो कभी राज्य की रक्षा के लिए खुद तलवार उठा ली। भारत की आजादी के 70 साल पूरे होने के मौके पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाया रहा है। इस मौके पर भारतीय महिला योद्धाओं के बारे में जानिए।
Azadi Ka Amrit Mahotsav: भारत की पांच महिला योद्धा, जिनका इतिहास में है दमदार योगदान
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रानी दुर्गावती
चंदेल के राजपूत राजा के परिवार में रानी दुर्गावती का नाम इतिहास में दर्ज है। रानी दुर्गावती का विवाह गोंडवाना में हुआ। लेकिन पति की मौत के बाद रानी दुर्गावती ने बेटे का मार्गदर्शन करते हुए शासन किया। रानी दुर्गावती अपने साहस और वीरता के लिए जानी जाती हैं। जब मुगलों ने आक्रमण किया तो रानी दुर्गावती ने उनके खिलाफ युद्ध भी लड़ा। उस दौरान ख्वाजा अब्दुल मजीद आसफ खान ने रानी दुर्गावती की सेना को अपने कब्जे में करने की कोशिश की लेकिन रानी अंत तक लड़ती रहीं। वह युद्ध में घायल हो गईं लेकिन युद्ध जारी रहा। वह मुगलों के सामने आत्मसमर्पण करने को तैयार नहीं थी, ऐसे में उन्होंने खुद को खंजर मारकर अपने प्राणों का बलिदान कर दिया।
सिख योद्धा मई भागो
अमृतसर की जमीं से कई योद्धा अस्तित्व में आए। यहां के एक प्रमुख जमींदार की बेटी भी महान योद्धा के तौर पर प्रसिद्ध हैं। माई भागो नाम की महिला ने 1705 में मुक्तसर की लड़ाई में मुगल सेना के खिलाफ हथियार उठाए थे। 40 सिख योद्धाओं का नेतृत्व करते हुए उन्होंने मुगलों से युद्ध लड़ा था। कहा जाता है कि सिख सेना का मुकाबला 10000 मुगल सैनिकों से हुआ था।
रानी लक्ष्मी बाई
ब्रिटिश सरकार ने एक नया नियम लागू किया कि जिन राज्यों में किसी राजा की संतान न हो, वह ब्रिटिश सरकार के अधीन हो जाए। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने दामोदर नाम के एक बच्चे को गोद लिया था। पति के निधन के बाद वह सत्ता और दामोदर दोनों को बखूबी संभाल रही थीं। लेकिन अंग्रेजों के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने अंग्रेजी सेना से युद्ध किया। रानी लक्ष्मी बाई के अंग्रेजों से युद्ध करने की कहानी इतिहास में गौरवपूर्ण तरीके से दर्ज हो चुकी है। जब भी महिला योद्धाओं का नाम आता है, सबसे पहले झांसी की रानी लक्ष्मी बाई को याद किया जाता है।
मराठा महारानी ताराबाई
छत्रपति राजाराम भोसले की रानी और प्रसिद्ध मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू ताराबाई भोसले भी भारत की उन महिला योद्धाओं में शामिल हैं, जिनकी वीरता के किस्से आज भी सुनाए जाते हैं। ताराबाई भोसले ने पति की मृत्यु के बाद अपने राज्य को बचाने के लिए संघर्ष किया। मुगल सम्राट के खिलाफ युद्ध लड़ा। ताराबाई भोसले अपनी कुशल रणनीति के कारण औरंगजेब और उनकी सेना को हराने में सक्षम भी थीं।

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