पंजाब की बेटी और यूपी की बहु कही जाने वाली शीला दीक्षित देश की राजधानी की सत्ता संभाल चुकी हैं। शीला दीक्षित तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। वह कांग्रेस की दिग्गज नेताओं में शामिल थीं, जिनको राजनीतिक की सबसे कद्दावर महिला नेता माना जाता था। शीला दीक्षित का राजनीतिक करियर जितना दमदार है, उनकी निजी जिंदगी भी उतनी ही रोचक है। परिवार की मर्जी से प्रेम विवाह करने के लिए सालों का इंतजार किया और बाद में यूपी के एक राजनीतिक परिवार की बहू बनी शीला दीक्षित ने अपने ससुर ने राजनीति के दांव पेंच सीखे। शीला दीक्षित के पति प्रशासनिक सेवा में थे लेकिन शीला ने ससुर के कानूनी सलाहकार के तौर पर काम किया। संयोग से राजनीति में आने के बाद शीला दीक्षित युवा महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनी, कई राजनीतिक उपलब्धियां अपने नाम की और कांग्रेस नेताओं की टीम का एक बड़ा नाम बन गईं। आज शीला दीक्षित की जयंती है। दिल्ली के पूर्व सीएम शीला दीक्षित की जयंती पर जानें उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें।
Sheila Dikshit: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की जयंती पर जानें उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें
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शीला दीक्षित का बचपन, परिवार
शीला दीक्षित का जन्म ब्रिटिश शासन काल में 21 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली से की। कॉन्वेंट आफ जीसस एंड मैरी स्कूल से शुरुआती शिक्षा के बाद शीला दीक्षित ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से कला में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। बाद में पीएचडी की।
शीला दीक्षित का प्रेम विवाह
शीला दीक्षित ने अपनी किताब 'सिटीजन दिल्ली: माय टाइम्स माय लाइफ' में अपने जीवन से जुड़ी कई दिलचस्प बातें शेयर की थीं। उनके प्रेम विवाह का जिक्र भी किताब में है। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व राज्यपाल व केंद्रीय मंत्री रहे उमा शंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से उनका प्रेम विवाह हुआ था। शीला और विनोद एक ही क्लास में थे। दोनों को प्यार हो गया। चांदनी चौक के पास एक बस में सफर के दौरान विनोद ने शीला को शादी के लिए प्रपोज किया। परिवार तक बात पहुंची तो अंतरजातीय विवाह की अड़चन के कारण बात ठंडी पड़ गई। कॉलेज के बाद विनोद ने प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की और शीला दिल्ली के एक स्कूल में 100 रुपये की सैलरी में पढ़ाने लगी। बाद में विनोद ने अपने पिता का शीला से मिलवाया। उमाशंकर दीक्षित को शीला पसंद आईं लेकिन उन्होंने बताया कि इस शादी के लिए विनोद की मां को मनाना होगा। विनोद और शीला ने दो साल इंतजार किया और अंत में दोनों की शादी परिवार की रजामंदी से हुई।
शीला दीक्षित का राजनीतिक करियर
कॉलेज के बाद एक टीचर के तौर पर काम करने वाली शीला दीक्षित ने शादी के बाद अपने ससुर के लिए काम करना शुरू किया। उनके ससुर उमाशंकर दीक्षित उन दिनों इंदिरा गांधी की सरकार में मंत्री बने तो शीला ससुर की कानूनी सहायता करती थीं। इंदिरा गांधी को जब शीला दीक्षित के बारे में पता चला तो उन्होंने शीला को संयुक्त राष्ट्र कमिशन के दल के सदस्य के तौर पर नामित किया। इसका उद्देश्य महिलाओं का प्रतिनिधित्व करना था। यहां से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई। 1970 में शीला युवा महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं। फिर 1984 से 1989 तक कन्नौज सीट से शीला दीक्षित लोकसभा सदस्य बनीं।
शीला दीक्षित की उपलब्धि
कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने केंद्रीय मंत्री के पद पर काम किया। दो पीएमओ में उन्होंने राज्यमंत्री संसदीय कार्य मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला। 1990 में शीला दीक्षित ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचार को लेकर आंदोलन किया था। बाद में 1998 में शीला दीक्षित पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी और लगातार तीन बार यानी 15 साल तक (2013) इस पद पर बनी रहीं। 2014 में उन्हें केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया, हालांकि उन्होंने कुछ महीनों बाद ही इस पद से इस्तीफा दे दिया। 2015 में आम आदमी पार्टी से हार के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल बने और शीला दीक्षित ने इस्तीफा दे दिया।

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