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बहुत सारी महिलाओं को होती हैं ये बीमारी लेकिन फिर भी रहती हैं अपने स्वास्थ्य से लापरवाह

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Tue, 16 Feb 2021 10:50 AM IST
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every third women of india suffering of pelvic congestion syndrome
women - फोटो : सोशल मीडिया

भारत में महिलाओं की स्वास्थ्य की स्थिति अच्छी नही है। ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी महिलाएं बहुत सारी मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों से जूझती रहती हैं। लेकिन अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही उनके लिए भारी पड़ जाती है। शरीर में होने वाले गंभीर लक्षणों को अनदेखा करने के कारण उन्हें कई सारी तकलीफों का सामना करना पड़ता है। जिसमें से एक समस्या ये भी है। 

every third women of india suffering of pelvic congestion syndrome
- फोटो : pixabay

ऐसी ही समस्या जो भारत की लगभग हर तीसरी महिला में देखने को मिलती है, वो है पेट के निचले हिस्से में दर्द। ये दर्द पेट के निचले हिस्से से लेकर कूल्हे और जांघों तक होता है। लेकन वो इस दर्द को सामान्य पीरियड का दर्द समझ कर दरकिनार करती हैं। लेकिन ये दर्द गंभीर बीमारी पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं। जिसका सही इलाज बहुत जरूरी है। 

every third women of india suffering of pelvic congestion syndrome

इस तरह के दर्द को महिलाएं पीरियड का सामान्य दर्द समझ कर नजर अंदाज करती हैं। जो कि ठीक नही है क्योंकि लगातार छह महीने से ज्यादा अगर ये दर्द शरीर में बना रहे तो ये पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम यानी PCS का रूप ले लेता है। जिसमें खड़े होने पर भी बेहद तेज दर्द होता है। इस बीमारी में जांघ, नितंब और योनि क्षेत्र की नसों के सामान्य से ज्यादा खिंच जाने की वजह से असहनीय दर्द होना शुरू हो जाता है। ज्यादातर 20 से 45 आयु वर्ग की महिलाएं इसकी शिकार होती हैं जो महिलाएं हाल ही में मां बनती हैं, युवा होती हैं,या कई बार मां बन चुकी होती हैं,  उन्हें यह समस्या अधिक होती है क्योंकि इसी उम्र में वह संकेतों को नजर अंदाज कर देती हैं, नतीजा समस्या बढ़ जाती है। इस बीमारी का कारण होता है हार्मोनल और शरीर की बनावट में गड़बड़ी। 

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- फोटो : Social Media

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओं में होने वाले हार्मोंस में बदलाव और वजन बढ़ने के कारण कूल्हे के आसपास के हिस्सों में बदलाव आता है। गर्भाशय की नसों पर दबाव बढ़ने के कारण ये कमजोर होकर फैल जाती हैं। जिसकी वजह से वॉल्व बंद नही होते और रक्त वापस शिराओं में आ जाता है। जिसकी वजह से पेल्विक एरिया में खून के दबाव के कारण दर्द बढ़ जाता है। इसके इलाज के लिए किसी तरह के ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती है। बस खराब नसों को बंद कर दिया जाता है। जिससे कि उनमें रक्त जमा न हो। ये किसी भी तरह की सर्जरी से आसान प्रक्रिया है और इसके इलाज के बाद ये पूरी तरह से ठीक हो जाता है। लेकिन महिलाओं को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं होती और वो इस कष्ट को सहती रहती हैं। 

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