आज के समय में महिलाएं पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर तो चल ही रही हैं। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों से काफी आगे भी निकलते जा रही हैं। आज हम आपको भारत की उन महिला वैज्ञानिकों के बारे में बताएंगे जिन्होंने दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है। आज के समय में विज्ञान काफी तरक्की कर चुका है और इसमें महिला वैज्ञानिकों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। आइए जानते हैं उन भारतीय महिला वैज्ञानिकों के बारे में जिन्होंने इतिहास रचकर भारत का मान-सम्मान बढ़ाया है...
{"_id":"5f2d578a8ebc3e3d04403565","slug":"indian-famous-women-scientists-who-created-history","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"भारत की इन महिला वैज्ञानिकों ने इतिहास रच बढ़ाया है देश का मान, विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं मानी हार","category":{"title":"Shakti","title_hn":"शक्ति","slug":"shakti"}}
भारत की इन महिला वैज्ञानिकों ने इतिहास रच बढ़ाया है देश का मान, विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं मानी हार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Fri, 12 Feb 2021 09:04 AM IST
विज्ञापन
कई क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों से काफी आगे भी निकलते जा रही हैं
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आनंदीबाई गोपालराव जोशी भारत की पहली महिला फिजीशयन थीं
- फोटो : social media
आनंदीबाई गोपालराव जोशी
- आनंदीबाई गोपालराव जोशी भारत की पहली महिला फिजीशयन थीं। आनंदीबाई की शादी महज 9 साल की उम्र में हो गई थी। 14 साल की उम्र में आनंदीबाई मां बन गई थीं, लेकिन दवाई की कमी के कारण उनके बेटे की कम उम्र में ही मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने दवाईयों पर रिसर्च करने की सोची। आपको बता दें आनंदीबाई के पति उनसे उम्र में 20 साल बढ़े थे। आनंदीबाई के पति ने उन्हें विदेश जाकर मेडिसिन पढ़ने के लिए प्रेरित किया था। आनंदीबाई ने वुमन्स मेडिकल कॉलेज पेंसिलवेनिया से पढ़ाई की थी। परिस्थितियां विपरित होने के बावजूद आनंदीबाई ने कभी भी हार नहीं मानी।
जानकी अम्माल को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था
- फोटो : social media
जानकी अम्माल
- जानकी अम्माल को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। पद्मश्री सम्मान पाने वालीं वो देश की पहली महिला वैज्ञानिक थीं। 1977 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा था। जानकी अम्माल बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर के पद पर भी कार्यरत रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कमला सोहोनी प्रोफेसर सी वी रमन की पहली महिला स्टूडेंट थीं
- फोटो : social media
कमला सोहोनी
- कमला सोहोनी प्रोफेसर सी वी रमन की पहली महिला स्टूडेंट थीं और कमला सोहोनी पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक भी थीं जिन्होंने PhD की डिग्री हासिल की थी। कमला सोहोनी ने ये खोज की थी कि हर प्लांट टिशू में ‘cytochrome C’ नाम का एन्जाइम पाया जाता है।
विज्ञापन
असीमा चटर्जी केमेस्ट्री में अपने कार्यों के लिए काफी प्रसिद्ध रहीं
- फोटो : social media
असीमा चटर्जी
- असीमा चटर्जी केमेस्ट्री में अपने कार्यों के लिए काफी प्रसिद्ध रहीं। असीमा चटर्जी ने कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से 1936 में केमेस्ट्री सब्जेक्ट में ग्रैजुएशन की थी। एंटी-एपिलिप्टिक (मिरगी के दौरे), और एंटी-मलेरिया ड्रग्स का डेवलपमेंट असीमा चैटर्जी ने ही किया था। असीमा चैटर्जी कैंसर से जुड़ी एक रिसर्च में भी शामिल थीं।

कमेंट
कमेंट X