भारत देश में लिंग की असमानता का मुद्दा हमेशा से रहा है। महिलाओं को हमेशा से ही अपने सपनों को पूरा करने की आजादी नहीं थी। लेकिन फिर भी इन महिलाओं ने ऐसे व्यवसायों को चुना जिसमें केवल पुरुष ही जाया करते थे। इन महिलाओं ने अपने कार्य की उत्कृष्टता से सबको हैरत में डाला और अपना नाम इतिहास के पन्नों पर दर्ज कराया।। आगे की स्लाइड में देखिए ऐसी ही पांच अपने क्षेत्र की अग्रणी महिलाओं की कहानी।
भारत की पांच 'पहली महिलाएं' जिन्होंने अपने क्षेत्र की बाधाओं को पार कर पूरा किया अपना जुनून
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21वीं सदी में भी वैश्विक स्तर पर एयरलाइन पायलटों में से महिला पायलटों की संख्या मात्र कुछ हजार है। आज की इतनी आधुनिक सोसाइटी में महिला पायलटों की इतनी कम संख्या अच्छा विषय नही हैं। लेकिन भारत को आजादी के कुछ सालों बाद ही पहली कमर्शियल महिला पायलट मिल गई थी। जिसने डैक्कन एयरवेज के लिए उड़ान भरी थी। ये महिला पायलट थीं कैप्टन प्रेमा माथुर जिन्होंने 1947 में अपना वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस प्राप्त किया और 1949 में नेशनल एयर रेस जीती।
भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी सबसे ज्यादा चर्चित महिला हैं। राजनीति विज्ञान व्याख्याता के रूप में अपना करियर चुनने वाली किरण बेदी ने जुलाई 1979 को भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन कर लिया था। 2007 में उन्होंने स्वेच्छा से सेवानिवृत होने का फैसला कर लिया था।
1989 में भारत को अपनी पहली महिला सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश, एम फातिमा बीवी मिली। उन्होंने केरल में निचली न्यायपालिका में अपने करियर की शुरूआत की और बाद में 1972 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बन गई। 1984 में वह उच्च न्यायालय की स्थायी न्यायाधीश बन गईं और सिर्फ पांच साल बाद 6 अक्टूबर को न्यायाधीश के रूप में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया, जहां वह 29 अप्रैल 1992 को सेवानिवृत्त हुईं।
पुनीता अरोड़ा भारतीय सर्वोच्च सशस्त्र बल की लेफ्टिनेंट जनरल और बाद में भारतीय नौसेना की वाइस एडमिरल नियुक्त होने वाली पहली भारतीय महिला बनी। 1963 में सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज, पुणे में नियुक्त होने के उन्होंने भारतीय सशस्त्र बल में 36 साल का समय गुजारा जिसमें उन्हें 15 पदकों से सम्मानित किया गया।

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