भारत में कई सशक्त महिलाएं हुईं, जिन्होंने अपने अभूतपूर्व योगदान और कार्यों के जरिए सुनहरे अक्षरों में इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज कराया। देश के इतिहास में पहली महिला इंजीनियर, डॉक्टर, पायलट और कई अन्य पदों पर पहली महिला ने स्थान पाया और फिर औरतों के लिए उस क्षेत्र में अपनी जगह बनाने की राह खोली। लेकिन एक ऐसी महिला भी हैं, जिनके स्थान पर दशकों बाद भी कोई अपनी जगह नहीं बना पाया। बात यहां देश की इकलौती महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में हो रही है। इंदिरा गांधी के बाद से अब तक देश को कोई महिला प्रधानमंत्री नहीं मिली। इंदिरा नारी शक्ति का बेमिसाल प्रतीक हैं। बतौर प्रधानमंत्री उनके दमदार फैसलों ने पूरे देश में क्रांति ला दी थी। जब उन्हें नेहरू की राजनीतिक विरासत सौंपी गई, तो माना गया कि वह एक गूंगी गुड़िया बनकर रहेंगी लेकिन इंदिरा अपने फैसले लेने के लिए खुद सक्षम थीं, यह उन्होंने साबित कर दिया। 31 अक्तूबर को इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर जानें देश की आयरन लेडी के बारे में रोचक बातें।
Indira Gandhi Death Anniversary: इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि आज, इकलौती महिला जो बनी भारत की प्रधानमंत्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंदिरा गांधी का जीवन
19 नवंबर 1917 को इंदिरा गांधी का जन्म जवाहर लाल नेहरू के घर पर हुआ था। एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली इंदिरा में भी गजब की राजनीतिक दूरदर्शिता थी। महज 11 वर्ष की आयु में इंदिरा ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बच्चों की वानर सेना बनाई थी। 1938 में वह औपचारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुईं। जब जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने तो इंदिरा गांधी ने उनके साथ काम करना शुरू किया।
संभाली परिवार की राजनीतिक विरासत
इंदिरा गांधी को राजनीति विरासत में मिली थी। पिता के निधन के बाद कांग्रेस पार्टी में इंदिरा गांधी की प्रतिष्ठा बढ़ी। इंदिरा को देश के नेता के तौर पर देखा जाने लगा। लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। शास्त्री जी के निधन के बाद 1966 में इंदिरा गांधी को देश के शक्तिशाली पद यानी प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला। 'गूंगी गुड़िया' कही जाने वाली इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसे फैसले लिए जिसकी गूंज दुनिया भर तक पहुंची।
इंदिरा गांधी के दमदार फैसले
बैंकों का राष्ट्रीयकरण
इंदिरा गांधी ने बैंकों का लाभ हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। 1966 में भारत में केवल 500 बैंक शाखाएं थीं। लेकिन आम आदमी बैंक में पैसा जमा कर सके इसके लिए उनका यह फैसला देश के विकास में अभूतपूर्व रहा। हालांकि उनके इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी।
कांग्रेस का विभाजन
इंदिरा गांधी के सत्ता में आने के बाद लोग समझ गए कि इस महिला को रोक पाना मुश्किल है। कांग्रेस सिंडिकेट ने इंदिरा को पद से हटाने की तैयारी शुरू कर दी। इंदिरा ने पार्टी का विभाजन कर उल्टा दांव खेला। उनके इस फैसले को राजनीति के दौर का सबसे दबंग और हिटलरशाही फैसला माना गया।
पाकिस्तान से जंग और बांग्लादेश का उदय
भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान ने कब्जा नीति शुरू कर दी। इस कारण बड़ी संख्या में बंगाली शरणार्थी भारत आने लगे। उस दौर में पाकिस्तान को अमेरिका का समर्थन था। लेकिन इंदिरा किसी से डरी नहीं और पूर्वी पाकिस्तान पर हमला कर उस इलाके को आजाद कराया व बांग्लादेश का निर्माण किया।
आपातकाल
इंदिरा के शासनकाल का सबसे बड़ा और विवादास्पद फैसला आपातकाल रहा। 1971 में उनके खिलाफ जब चुनावों में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगा तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1975 के लोकसभा चुनाव को रद्द कर दिया। इंदिरा पर 6 साल चुनाव न लड़ने का बैन लगा दिया। मौके का फायदा उठाते हुए विपक्ष ने इंदिरा से इस्तीफा मांगा। लेकिन इंदिरा ने विपक्ष, कोर्ट और हालातों के विपरीत देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। प्रेस की आजादी पर रोक लग गई। कई बड़े फेरबदल हुए।

कमेंट
कमेंट X