Indira Gandhi Death Anniversary 2023: देश की कई दिग्गज महिलाएं हैं जो नारी शक्ति की मिसाल हैं। इन महिलाओं का जीवन हर किसी के लिए प्रेरणा है। आज के दौर में स्त्री को शिक्षा हासिल करने, सपने देखने, करियर बनाने और आर्थिक तौर पर सशक्त बनने के लिए प्रोत्साहित करने वाली इन्हीं महिलाओं की सूची में एक नाम इंदिरा गांधी का है। इंदिरा गांधी देश की पहली और इकलौती महिला प्रधानमंत्री हैं।
Indira Gandhi Death Anniversary: देश की इकलौती महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में जानें रोचक बातें
31 अक्तूबर को इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है। इस मौके पर जानिए देश की आयरन लेडी (लौह महिला) कही जाने वाली इंदिरा गांधी की कहानी, जो मिसाल बन गई।
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इंदिरा गांधी का जीवन परिचय
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के घर 19 नवंबर 1917 में बेटी का जन्म हुआ, जिसका नाम इंदिरा रखा गया। राजनीतिक परिवार में जन्मी इंदिरा में गजब की राजनीतिक दूरदर्शिता थी। इंदिरा ने महज 11 वर्ष की आयु में ब्रिटिश शासन के खिलाफ बच्चों की वानर सेवा का गठन किया। 1938 में औपचारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुईं और पिता के राजनीतिक कार्यों में उनका हाथ बटांने लगीं।
परिवार की विरासत की उत्तराधिकारी
जब जवाहर लाल नेहरू का निधन हुआ तो कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी के हाथों में आई। वह लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं। शास्त्री के निधन के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदार बनाया गया ताकि नेहरू के उत्तराधिकारी के तौर पर उन्हें राजनीति में उतारा जा सके। उस समय तक उन्हें 'गूंगी गुड़िया' समझा जाता था। 1966 में जब इंदिरा गांधी को देश की प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला तब देश ने इस मूक गुड़िया के फैसलों की गूंज सुनी।
इंदिरा गांधी के दमदार फैसले
बैंकों का राष्ट्रीयकरण
1966 में भारत में महज 500 बैंक शाखाएं थीं। आम आदमी बैंक में पैसा जमा नहीं कर पाता था। बैंकों का लाभ हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। उनका यह फैसला देश के विकास में महत्वपूर्ण रहा।
कांग्रेस का विभाजन
कांग्रेस में शामिल कई नेता समझ चुके थे कि इंदिरा गूंगी गुड़िया या साधारण महिला नहीं, राजनीति में उन्हें रोक पाना मुश्किल है। कांग्रेस सिंडिकेट इंदिरा को पद से हटाने की तैयारी करने लगा तो इंदिरा गांधी ने पार्टी का विभाजन करके उस दौर की राजनीति में सबसे दबंग और हिटलरशाही फैसला लिया।

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