International Women's Day 2023: हर साल दुनियाभर में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाएं समाज का अभिन्न अंग हैं, जो राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दे रही हैं। हालांकि महिलाओं को पुरुषों के बराबर का सम्मान और अधिकार नहीं मिलता। कई बार 'ये तो औरत है' कहकर महिलाओं को पीछे धकेल दिया जाता है। दुनिया के तमाम देशों में महिलाओं को समान अधिकार, उन्नति के समान अवसर और हर क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने और सुरक्षित वातावरण देने के लिए भारतीय संविधान में महिलाओं को कुछ अधिकार दिए गए हैं। लेकिन महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में पता ही नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारतीय संविधान में शामिल कुछ मुख्य महिला अधिकारों के बारे में जानकारी दी जा रही है, जिसके बारे में हर महिला को पता होना चाहिए।
International Women's Day 2023: महिलाओं के खास अधिकार, हर स्त्री को होनी चाहिए जानकारी, जिंदगी हो जाएगी आसान
समान वेतन का अधिकार
मजदूर से लेकर नौकरीपेशा कर्मचारियों में देखने को मिलता है कि एक समान कार्य के लिए भी पुरुष और महिला के वेतन में अंतर होता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम मेहनताना दिया जाता है। संविधान महिलाओं को समान पारिश्रमिक का अधिकार देता है। समान पारिश्रमिक अधिनियम के तहत, वेतन या मजदूरी में लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता। समान कार्य के लिए पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन दिए जाने का प्रावधान है।
मातृत्व संबंधी लाभ का अधिकार
जो महिला नौकरीपेशा हैं उन्हें मातृत्व संबंधी लाभ व सुविधा लेने का अधिकार मिलता है। मातृत्व लाभ अधिनियम के अंतर्गत, प्रसव के बाद महिला 6 महीने की छुट्टी ले सकती हैं और इस दौरान उनके वेतन में कोई कटौती नहीं होगी। बाद में उसे काम पर लौटने का भी अधिकार रहेगा।
नाम और पहचान गोपनीय रखने का अधिकार
महिला अपराध को लेकर भी महिलाओं को कुछ अधिकार मिले हुए हैं। भारत में यौन शोषण के मामले में पीड़िता का नाम और पहचान गोपनीय रखने का अधिकार होता है। यौन उत्पीड़न के केस में गोपनीयता रखने के लिए महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में दर्ज कराने का अधिकार रखती है। जिलाधिकारी के सामने भी महिला अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकती है। साथ ही पुलिस, मीडिया और अधिकारी को महिला की पहचान जाहिर करने का अधिकार नहीं है।
मुफ्त कानूनी मदद का अधिकार
बलात्कार या यौन शोषण पीड़ित महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का अधिकार भारतीय संविधान देता है। पीड़ित महिला थाने में एसएचओ से मदद मांग सकती है और एसएचओ विधिक प्राधिकरण के वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचना देता है।

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