International Women's Day 2023: 27 फरवरी को एनजीओ दिवस मनाया जाता है। एनजीओ का अर्थ है गैर सरकारी संगठन। एनजीओ समाज के असहाय वर्ग और जरूरतमंदों की मदद के लिए कार्य करने वाला संगठन है। यह एक ऐसी संस्था है जो सरकार या किसी व्यवसायी के लिए कार्य नहीं करती और न ही इसका उद्देश्य किसी तरह का लाभ कमाना है, बल्कि जनसेवा के उद्देश्य से कार्य करती है। जरूरतमंदों की मदद, गरीब बेसहाराओं के दुख-दर्द में उनका साथ देना एनजीओ का कार्य है। एनजीओ में कार्य करने वाले लोग समाज के जुड़े किसी भी वर्ग के लोग हो सकते हैं। वहीं जब संगठन से अलग व्यक्तिगत स्तर पर कोई शख्स समाज सेवा का कार्य करता है तो उसे समाजसेवी कहते हैं। 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं। भारत में ऐसी कई महिलाएं हैं, जो मानवसेवा को लेकर अपने प्रयासों के कारण अपने आप में ही एनजीओ बन गईं। इन भारतीय महिलाओं ने समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान देते हुए गरीबों, बेसहारा लोगों की मदद की। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर भारत की पांच समाजसेवी महिलाओं के बारे में जानिए, जिनका मानव सेवा में योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
International Women's Day 2023: जरूरतमंदों और असहायों को दिया सहारा, ये हैं भारत की पांच महिला समाज सेविकाएं
मदर टेरेसा
जब भी समाज और मानव सेवा का जिक्र होगा, सबसे पहले मदर टेरेसा का नाम लिया जाएगा। मदर टेरेसा ने कम उम्र में ही मानव सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया था और इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई देशों की यात्रा की। अल्बानिया से आयरलैंड और फिर 1929 में भारत आईं। यहां उन्होंने भारतीयों की मदद में जीवन गुजारा। बाद में साल 1948 में मदर टेरेसा को भारत की नागरिकता मिल गई। मदर टेरेसा को नोबेल शांति पुरस्कार और भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।
सिंधुताई सपकाल
महाराष्ट्र की सिंधुताई सपकाल हजारों अनाथ बच्चों की मां बनीं। उन्होंने रेलवे स्टेशन, फुटपाथ पर बैठने वाले गरीब और अनाथ बच्चों को आसरा दिया। उनका पेट भरने के लिए खुद सड़कों पर भीख मांगी। 1400 बच्चों की मां बनकर सिंधुताई सपकाल महाराष्ट्र की मदर टेरेसा बन गईं। सिंधुताई सपकाल को 700 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं।
बसंती देवी
उत्तराखंड की बसंती देवी ने पर्यावरण संरक्षण, देश की संस्कृति और लोगों के जीवन में सुधार के लिए अतुलनीय प्रयास किए। कोसी नदी को बचाने, समाज में फैली कुरीतियों जैसी घरेलू हिंसा, महिलाओं पर होने वाले उत्पीड़न को दूर करने के लिए बसंती देवी ने महिला समूहों का आह्वान किया। महिला समूहों के माध्यम से उत्तराखंड के जंगलों को बचाने की मुहिम चलाई। बीते वर्ष बसंती देवी को पद्म पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया था।
अरुणा राय
राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय जब भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत थीं, तो उन्होंने राजस्थान के गरीब लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काफी प्रयास किया। बाद में सूचना का अधिकार कानून लागू कराने के लिए 6 अप्रैल 1995 में अजमेर के ब्यावर में आंदोलन किया। रोजगार गारंटी और सूचना का अधिकार कानून बनाने में अरुणा राय की भूमिका अहम रही। इसके अलावा अरुणा राय मजदूर किसान शक्ति संगठन की संस्थापिका भी थीं। अरुणा राय को मैग्सेसे पुरस्कार और मेवाड़ सेवा श्री समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

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