भारत पुरुष प्रधान देश है लेकिन यहां की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं। देश की महिलाएं अपनी काबिलियत के दम पर दुनिया भर में मिसाल बन गई हैं। आज देश की महिलाएं जिस मुकाम पर हैं उसी नींव इतिहास की कुछ महिलाओं ने रखी। महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिलाने दिलाने और समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने के लिए इतिहास की महिलाओं ने अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। जिसके बाद महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल पाया। जिस देश में घर का मुखिया पिता और राष्ट्र का मुखिया राजा होता था, वहां कुछ ऐसी राजकुमारियां भी आईं, जिन्होंने समाज से लड़कर अपने नियम कायदे लागू करवाए। उन्होंने सालों से चली आ रही परंपराओं की जंजीरे तोड़ महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की। चलिए जानते हैं भारत की पांच दमदार और प्रसिद्ध राजकुमारियों के बारे में।
Top 5 Indian Princesses: इन राजकुमारियों ने समाज को बदलने के लिए उठाए बड़े कदम, पुरुष प्रधान देश में लागू किए अपने नियम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कूंच बिहार की महारानी इंदिरा देवी
इंदिरा देवी बड़ौदा के महाराज सयाजीराव गायकवाड़ की दूसरी पत्नी की बेटी थीं। इंदिरा देवी की शादी कम उम्र में ही ग्वालियर के माधवराव सिंधिया के साथ तय हो गई थी। लेकिन दिल्ली के एक कार्यक्रम में शिरकत के दौरान उनकी मुलाकात कूंच बिहार के राजा के छोटे भाई राजकुमार जितेंद्र से हुई। दोनों को प्यार हो गया और उन्हें ग्वालियर पत्र लिखकर खुद अपनी सगाई तोड़ दी थी। उस दौर के राजघरानों में ये विवादित मुद्दा बन गया। इंदिरा को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा पर उन्हें किसी बात की परवाह किए बिना जितेंद्र से शादी कर ली। कूंच बिहार के राजा की मौत के बाद जितेंद्र राजा बन गए लेकिन शादी के 10 साल में वह भी गुजर गए। इंदिरा देवी की उम्र बहुत ज्यादा नहीं थी लेकिन उन्होंने राजघराने और पांच बच्चों को संभाला।
जयपुर की महारानी गायत्री देवी
इंदिरा देवी के पांच बच्चों में एक गायत्री देवी थीं। कूंच बिहार की राजकुमारी गायत्री देवी ने परिवार और समाज के विरोध के बाद भी 1940 में जयपुर के राजा सवाई मान सिंह बहादुर से शादी की थी। गायत्री देवी ने भी अपनी मां की तरह की अपनी शादी के लिए दुनिया या समाज की कोई परवाह नहीं की थी। कहते हैं कि गायत्री देवी जब 12 साल की थीं तो उन्हें राजा मान सिंह बहादुर से प्यार हो गया था, वह उस समय 21 साल के थे। जब गायत्री देवी 16 साल की हुईं तो 9 साल बड़े सवाई मान सिंह ने उनसे शादी के लिए पूछा था। राजा सवाई मान सिंह पहले से शादीशुदा थे लेकिन गायत्री देवी से सबके खिलाफ जाकर सवाई मान सिंह की तीसरी पत्नी बनना स्वीकार कर लिया। गायत्री देवी को इंदिरा गांधी का प्रतिद्वंदी माना जाता था। गायत्री देवी संसद की सदस्य थीं। उनके प्रयास से जयपुर में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खुल सका था। लड़कियों की स्थिति को मजबूत करने के लिए उनका एक और कदम उठाया था। उन्होंने फैसला किया था कि वह कभी घूंघट नहीं करेंगी।
कपूरथला की राजकुमारी सीता देवी
काशीपुर के राजा की बेटी राजकुमारी सीता देवी ने भी पारंपरिक रिवाजों की जंजीरों में बंधने से मना कर दिया था। 13 साल की उम्र में उनकी शादी कपूरथला के महाराजा के छोटे बेटे कमरजीत से कर दी गई। सीता देवी ने शादी के बाद कई यूरोपीय भाषाएं सीखी। 1936 में भारत की राजकुमारी सीता देवी को वोग मैग्जीन ने 'सेक्युलर गॉडेस' का खिताब दिया था। लुक मैग्जीन ने उन्हें दुनिया की 5 सबसे अच्छी ड्रेस्ड महिलाओं की सूची में शामिल किया था। उन्हें उस जमाने में फैशन आइकन माना जाता था। एक राजकुमारी दुनिया में अपने फैशन सेंस के कारण मशहूर हो गई थी।
हैदराबाद की राजकुमारी नीलोफर
राजकुमारी नीलोफर ऑटोमन साम्राज्य की आखिरी राजकुमारी थीं। उनका जन्म तुर्की में हुआ था। हैदराबाद के निजाम उस दौर में दुनिया के सबसे अमीर शासक हुआ करते थे। नीलोफर की शादी हैदराबाद के निजाम से हुई। एक तरफ तो नीलोफर एलीट महिलाओं के क्लब की सदस्य थीं, तो दूसरी तरफ समाज सेवा और चैरिटी किया करती थीं। उन्होंने हैदराबाद के रेड हिल्स इलाके में एक अस्पताल की निर्माण कराया था। उन्होंने शानो शौकत भरी लाइफ और शाही राजकाज में अपना जीवन न बिताते हुए जरूरतमंदों की मदद के लिए काम किया।

कमेंट
कमेंट X