Navratri 2022: नवरात्रि के मौके माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवदुर्गा के सभी स्वरूपों का हर दिन पूजन किया जाता है। यह पर्व धार्मिक महत्व रखता है, साथ ही नारी शक्ति का भी प्रतीक है। नवरात्रि के नौ दिन और उपवास के अंत में कन्या पूजन के जरिए नारी के सम्मान को दर्शाया जाता है। देश की हर महिला कहीं न कहीं माता दुर्गा के नव स्वरूपों में नजर आ जाती हैं। आज भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में तरक्की कर रही हैं। माता अन्नपूर्णा की तरह घर परिवार को संभालने के साथ ही आदिशक्ति की तरह देश की रक्षा और समाज कल्याण के दिशा में कार्य कर रहीं हैं। खेल जगत से लेकर राजनीति के क्षेत्र तक और रक्षा मंत्रालय से लेकर वित्त मामलों तक हर क्षेत्र में महिलाएं सफलता पूर्वक देश का कार्य भार संभाल रही हैं। नवरात्रि के मौके पर मिलिए देश की नवदुर्गा से, जिन्होंने राजनीति के क्षेत्र में कमाया नाम और पहचान।
Navratri 2022: राजनीति के क्षेत्र की ये नौ दिग्गज महिलाएं, जो नारी शक्ति की बन गईं मिसाल
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द्रौपदी मुर्मू
भारत के सर्वोच्च पद पर एक महिला आसीन है। देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की राजनीतिक पृष्ठभूमि ओडिशा से रही। उन्होंने पार्षद का चुनाव जीता। फिर अनुसूचित जनजाति मोर्चा का उपाध्यक्ष बनीं। ओडिशा में भाजपा और बीजू जनता दल की गठबंधन की सरकार में साल 2000 से 2002 कर वह वाणिज्य और परिवहन स्वतंत्र प्रभार मंत्री रहीं। साल 2002 से 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री के तौर पर काम किया। उन्होंने ओडिशा के रायगंज विधानसभा सीट से विधायकी का चुनाव भी जीता। बाद में साल 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं। वह राज्य की पहली महिला गवर्नर बनीं।
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निर्मला सीतारमण
लगभग देश की हर लड़की को मितव्ययिता सिखाई जाती है। लेकिन देश के उच्च पद पर आसीन एक महिला इसी मितव्ययिता से देश संभाल रही हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम देश- विदेश में प्रसिद्ध है। देश की पहली पूर्णकालिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मोदी सरकार में पद मिला। उसके बाद से वह लगातार देश की वित्त मामलों को संभाल रही हैं। इसके पहले सीतारमण देश की रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं।
ममता बनर्जी
राजनीति में इन दिनों अगर किसी महिला की आवाज बुलंद है जो सत्ता, विपक्षी दलों और जनता तक पहुंच सके तो वह है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। ममता बनर्जी महिला सशक्तिकरण का सबसे जबरदस्त उदाहरण हैं। एक महिला पार्टी की लीडर होने के साथ ही प्रदेश की भी मुखिया भी है। लगातार तीन बार से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बने रहना आसान नहीं था लेकिन ममता बनर्जी के लिए कठिन भी नहीं। ममता केंद्र में लगातार दो बार रेल मंत्री भी रह चुकी हैं।
मायावती
उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसी महिला का सबसे ज्यादा दबदबा रहा तो वह हैं मायावती। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पार्टी प्रमुख होने के साथ ही खुद में एक ब्रांड भी हैं। भारतीय राजनीति में किसी महिला के लिए यह ओहदा पाना आसान बात नहीं है। लंबे समय से राजनीति में रहने के बाद मायावती की पहचान 'बहन जी' के तौर पर बन गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं।

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