Shardiya Navratri 2023: शारदीय नवरात्रि का पर्व जारी है। 22 और 23 अक्तूबर को महा अष्टमी और महानवमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दौरान दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन भी होता है। नौ दिवसीय पर्व के समापन में कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें नन्ही कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोज कराया जाता है, बाद में दान व तोहफे दिए जाते हैं।
Navratri 2023: नवरात्रि में कन्या पूजन ही नहीं, महिलाओं का करें सम्मान, अपनाएं ये आचरण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मां को दें वक्त
नारी को सम्मान और सुरक्षित महसूस कराने के लिए अलग से कुछ खास करने की जरूरत नहीं। शुरुआत घर से करें। जैसे एक देवी अपने हर भक्त की रक्षा मां के रूप में करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं, वैसे ही आपकी जन्मदात्री माता भी बच्चे के स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य की रक्षक बनती है और उनका लालन पालन करती हैं। हालांकि बड़े होने पर लोग अपने कामकाज और बीवी-बच्चों में व्यस्त होने के कारण मां को अनदेखा करने लगते हैं।
जगत मां की आराधना करने वाले हर भक्त को अपनी मां को पहले वक्त देना सीखना चाहिए। इस नवरात्रि संकल्प लीजिए कि आप अपनी माता के लिए कुछ सामान्य से काम करेंगे। जैसे मां का स्वास्थ्य कैसा है व क्या उन्हें किसी चीज की जरूरत है, ये पूछें। साथ ही रोजाना अपने व्यस्त जीवनशैली से कुछ पल निकालकर अपनी मां के पास बैठने की आदत डालें।
बहन को दें आजादी
बहन बेटियां घर का उत्साह और मुस्कान होती हैं। देवी की पूजा करके घर में खुशहाली की कामना करने वाले हर भक्त को बहन बेटी के चेहरे पर मुस्कान बनाए रखनी चाहिए। बहन-बेटी की रक्षा करना दायित्व है, लेकिन उसे बोझ समझ लड़कियों पर रोक टोक न लगाएं। अक्सर लड़कियां शादी से पहले माता पिता, भाई, पति और बेटे की मन मर्जी के मुताबिक रहती हैं। उन्हें शिक्षा से कपड़ों के चयन तक, दोस्तों के निर्धारण से बाहर जाने तक की अनुमति तक घर के पुरुषों पर निर्भरता रहना पड़ता है। इस नवरात्रि बहन-बेटियों की सुरक्षा के साथ ही उनकी आजादी का संकल्प लें। उन्हें बंदिशों में न बांधें, बल्कि आत्मनिर्भर और आत्म सुरक्षा के लिए तैयार कराएं।
पत्नी का सम्मान
नवरात्रि में देवी पूजा का प्रतीक केवल कन्या पूजन तक सीमित नहीं। मां, बहन या बेटी का सम्मान तो आप कर लेते हैं ,लेकिन क्या पत्नी को भी वही आदर देते हैं? हालांकि एक पत्नी में ही देवी के कई स्वरूप देखने को मिल जाते हैं। जैसे पत्नी को गृहलक्ष्मी और अन्नपूर्णा माना जाता है। ऐसे में बहु और पत्नी का सम्मान भी मां लक्ष्मी व माता अन्नपूर्णा की तरह किया जाना चाहिए। पत्नी को महसूस कराएं कि ससुराल उनका खुद का घर है, घर के हर सदस्य, हर चीज पर उनका हक है। वह ससुराल में अपने मनमुताबिक रह सकें और अपने माता पिता के घर को भूल जाएं तब वह सुखी और खुश महसूस कर पाएंगी।
बेटी को दें शिक्षा
बेटे को परिवार का वंश आगे बढ़ाने वाला मानकर परिवार उन को अधिक तवज्जो देता है। बेटे की खुशी और उसके उज्जवल भविष्य पर परिवार की खुशहाली निर्भर करने लगती हैं। इस कारण अक्सर लोग बेटियों की खुशियों और सपनों को अनदेखा कर देते हैं। बेटी को दूसरे घर जाएगी, ऐसा मानने वाले घर में विराजमान देवी को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। इसलिए आपकी बेटी दूसरे घर की लक्ष्मी और अन्नपूर्णा होती है। लेकिन बेटी का पालन ऐसे करें कि वह दो घरों की गृह लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा बन जाए। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएं। उनकी शिक्षा पर अधिक ध्यान दें। अगर आपकी बेटी का कोई लक्ष्य या सपना हो तो उसे पूरा करने में बेटी का साथ दें।

कमेंट
कमेंट X