Bhishma Ashtami 2026 Dos And Donts: हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह वही पुण्यतिथि है, जब महाभारत के महान योद्धा गंगापुत्र भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा के बाद अपने प्राण त्यागे थे। शास्त्रों में वर्णित है कि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था, इसलिए उन्होंने उत्तरायण काल को मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना। आज भीष्म अष्टमी मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन पितृ तर्पण, दान-पुण्य और संयमित जीवन के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। हालांकि, इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, तभी साधक को पूर्ण पुण्य की प्राप्ति होती है।
Bhishma Ashtami 2026: आज भीष्म अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम, यहां जानें नियम
Bhishma Ashtami 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भीष्म अष्टमी का दिन पितृ तर्पण, दान-पुण्य और संयमित जीवन के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। हालांकि, इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, तभी साधक को पूर्ण पुण्य की प्राप्ति होती है।
भीष्म अष्टमी पर क्या करें?
- इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद भीष्म पितामह के निमित्त तर्पण करना शुभ माना जाता है।
- तर्पण के लिए जल में काले तिल और कुश मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए।
- शास्त्रों के अनुसार, जिनके माता-पिता जीवित हैं, वे भी भीष्म पितामह के नाम से तर्पण कर सकते हैं, जिससे पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।
- तर्पण के समय “वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च। गंगापुत्राय भीष्माय प्रदास्येऽहं तिलोदकम्॥” मंत्र का जप करना विशेष फलदायी माना गया है।
- भीष्म पितामह ने जीवनभर ब्रह्मचर्य, त्याग और मर्यादा का पालन किया था, इसलिए इस दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करें।
- जरूरतमंदों को तिल, गुड़, अन्न और गर्म वस्त्रों का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
- मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष और ग्रह बाधाएं शांत होती हैं।
- यदि संभव हो, तो इस दिन भीष्म राज स्तोत्र का पाठ करें, जिससे भय का नाश होता है और मानसिक बल में वृद्धि होती है।
भीष्म अष्टमी पर क्या न करें?
- इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है।
- सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
- घर या बाहर किसी से विवाद करने से बचें, विशेषकर बुजुर्गों का अपमान करना पितृ दोष को बढ़ा सकता है।
- सूर्योदय के बाद देर तक सोना या आलस्य करना अशुभ माना जाता है, इसलिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- इस दिन बाल, दाढ़ी या नाखून काटने से भी बचना चाहिए।
- साथ ही, झूठ बोलना, निंदा करना या किसी की बुराई करना पूजा-पाठ के फल को निष्फल कर सकता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।