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Rath Saptami 2026: आज रथ सप्तमी पर 5 विशेष योग, सूर्य उपासना से दोष निवारण के योग

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 25 Jan 2026 07:00 AM IST
सार

Rath Saptami Shubh Yog: रथ सप्तमी को सूर्यदेव के रथ उत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसे भानु सप्तमी भी कहा जाता है। इस बार माघ शुक्ल सप्तमी के रविवार होने से इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। रथ सप्तमी पर पांच शुभ संयोग बन रहे हैं, जो सूर्य दोष, मान-सम्मान, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाने वाले माने जाते हैं। इस दिन सूर्य पूजा और विशेष उपाय करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
 

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Rath Saptami 2026 5 Auspicious Yogas to Remove Sun Dosha in hindi
Rath Saptami 2026 - फोटो : amar ujala

Rath Saptami 2026 Muhurat: रथ सप्तमी को भानु सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है और यह दिन सूर्यदेव की विशेष आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जिस महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रविवार पड़ता है, उस दिन रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार को पड़ रही है, जिसके कारण इस दिन रथ सप्तमी का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्यदेव अपने रथ पर सवार होकर उत्तरायण की गति को और प्रभावशाली बनाते हैं।


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इस बार की रथ सप्तमी और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन पांच शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इन योगों के कारण यह दिन कुंडली में मौजूद सूर्य दोष को दूर करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन विधि-विधान से सूर्यदेव की पूजा और विशेष उपाय करने से मान-सम्मान, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रथ सप्तमी कब है, इस दिन कौन-कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं और सूर्य दोष से मुक्ति के लिए कौन से उपाय किए जा सकते हैं।
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Rath Saptami 2026 - फोटो : adobe stock

रथ सप्तमी 2026 की तिथि 
दृक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी, रविवार को रात 12 बजकर 39 मिनट से होगी और इसका समापन उसी दिन रात 11 बजकर 10 मिनट पर होगा। उदयातिथि को मान्यता देने के कारण रथ सप्तमी का पर्व 25 जनवरी 2026 को ही मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथ सप्तमी सूर्यदेव को समर्पित एक विशेष पर्व है, जिसे भानु सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।

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Rath Saptami 2026 - फोटो : adobe stock

रथ सप्तमी का शुभ मुहूर्त
रथ सप्तमी के दिन सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट पर होगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 19 मिनट तक रहेगा, जो पूजा और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक का समय पूजा, दान और सूर्य उपासना के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना गया है।

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रथ सप्तमी 2026 को कई दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन रहा है। - फोटो : adobe stock

रथ सप्तमी पर बन रहे हैं 5 शुभ संयोग

  • रथ सप्तमी 2026 को कई दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। पहला शुभ संयोग रवि योग का है, जो सुबह 7 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्यदेव का प्रभाव अत्यंत प्रबल होता है और इसे दोष निवारण के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • दूसरा शुभ संयोग सर्वार्थ सिद्धि योग का है, जो दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 26 जनवरी की सुबह 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता अवश्य मिलती है।
  • तीसरा शुभ संयोग सिद्ध योग का है, जो प्रातःकाल से लेकर सुबह 11 बजकर 46 मिनट तक प्रभावी रहेगा। यह योग जप, ध्यान, साधना और आध्यात्मिक कार्यों के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।
  • चौथा शुभ संयोग साध्य योग का है, जो सुबह 11 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर 26 जनवरी की सुबह 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। यह योग भी कार्यों में सफलता और मनोकामना पूर्ति के लिए शुभ माना गया है।
  • पांचवां शुभ संयोग रेवती नक्षत्र का है, जो प्रातःकाल से लेकर दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अश्विनी नक्षत्र प्रारंभ होगा। रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं और इस नक्षत्र में शुभ कार्य करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
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तांबे के लोटे में जल, गुड़, लाल फूल और लाल चंदन डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। - फोटो : adobe stock

रथ सप्तमी पर सूर्य दोष के उपाय

  • कुंडली में सूर्य दोष होने पर रथ सप्तमी का दिन निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • इस दिन व्रत रखना और नियमपूर्वक सूर्यदेव की उपासना करना लाभकारी होता है।
  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और विधि-विधान से सूर्य पूजा करें।
  • तांबे के लोटे में जल, गुड़, लाल फूल और लाल चंदन डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
  • अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
  • पूजा के बाद लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, केसर, लाल चंदन, तांबा या सोने का दान करें।
  • मान्यता है कि इन उपायों से सूर्य दोष में कमी आती है।
  • इससे मान-सम्मान, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
  • योग्य ज्योतिषीय सलाह लेकर माणिक्य रत्न धारण करने से सूर्य ग्रह को बल मिलता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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