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Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के साथ होते हैं कई धार्मिक अनुष्ठान, जानिए ऐसी 10 मान्याताएं
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 22 Jan 2026 06:42 PM IST
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सार
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करने का महत्व होता है। इस दिन देवी सरस्वती की आराधना करने से बुद्धि, विवेक और सृजनात्मकता का विकास होता है।
वसंत पंचमी 2026
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
Basant Panchami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। बसंत पंचमी विद्या, ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना का का विशेष महत्व होता है। बसंत पंचमी पर, छात्र, शिक्षा कला, संगीत, साहित्य के क्षेत्र से जुड़े लोग इस दिन विशेषकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं। बसंत पंचमी पर ऋतु परिवर्तन का उत्सव मनाया जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी पर कई तरह की धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं हैं। आइए जानते हैं बसंत पचंमी और सरस्वती पूजा के पर्व से जुड़ी हुई 10 मान्यताएं।
1- मां सरस्वती का प्राकट्य पर्व
धार्मिक मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या की देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। इस कारण से बसंत पंचमी पर मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
2- बसंत ऋतु का आगमन
बसंत पंचमी के दिन से सर्दी कम होने लगती है और बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। वसंत ऋतु नई ऊर्जा, जोश, उत्साह और उमंग का प्रतीक है। वसंत ऋतु जीवन में रौनक का प्रतीक है।
3- वसंत पर विद्यारंभ संस्कार का महत्व
वसंत पंचम पर छोटे बच्चों के लिए विद्यारंभ संस्कार का खास महत्व होता है। इस दिन छोटे बच्चों से पहली बार अक्षर लिखवाया जाता है। इसे बहुत ही शुभ माना जाता है।
4- वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
वसंत पंचमी पर पीले रंगों का विशेष महत्व होता है। पीला रंग विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को बहुत ही प्रिय होता है। इसलिए वसंत पंचमी के दिन पूजा में पीले फूल, पीले रंग के कपड़े, पीला तिलक लगाने की परंपरा होती है। पीला रंग ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक होता है।
5- वसंत पंचमी पर कामदेव और रति की पूजा
शास्त्रों में वसंत को सभी ऋतुओं का राजा बताया गया है, इस मौसम में ऋतु परिवर्तन हर तरफ दिखाई देना लगता है। ऐसी मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के साथ कामदेव और उनकी प्रिया रति की भी पूजा की जाती है। वसंत पंचमी के दिन ही कामदेव और रति ने पहली बार मानव ह्रदय में प्रेम और आकर्षण का संचार किया था। इस दिन कामदेव और रति के पूजन का उद्देश्य दांपत्त्य जीवन को सुखमय बनाना है। शास्त्रों में कामदेव को प्रेम का देवता और ऋतुराज बसंत का मित्र कहा गया है।
ज्योतिष शास्त्र में वसंत पंचमी को एक अबूझ मूहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन किसी भी तरह के शुभ कार्यों को करने में मुहूर्त का विचार नहीं किया जाता है। ऐसे में इस दिन बिना मुहूर्त के शुभ काम जैसे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार आदि किए जा सकते हैं।
7- वसंत पंचमी पर कला और संगीत की देवी की पूजा
वसंत पंचमी का पर्व कला के क्षेत्र में कार्यरत कलाकार, गायक और संगीतकारों के लिए विशेष होता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ सभी तरह के वाद्ययंत्रों की भी पूजा करने का विधान होता है।
वसंत पंचमी के दिन से होली की शुरुआत हो जाती है। इस तरह से वसंत पंचमी के दिन होली पर्व की शुरुआत मानी जाती है।
9 शिव-पार्वती से जुड़ी कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी पर भगवान शिव को तिलक किया गया है इस कारण से इस खास महत्व है। ऐसी मान्यता है इस दिन से शिव-पार्वती के विवाह की तैयारी का दिन है।
वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा के बाद प्रसाद वितरण करने का खास महत्व होता है। इस दिन पीले चावल, पीले पकवान और मालपुआ का प्रसाद वितरण किया जाता है।
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1- मां सरस्वती का प्राकट्य पर्व
धार्मिक मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या की देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। इस कारण से बसंत पंचमी पर मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
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2- बसंत ऋतु का आगमन
बसंत पंचमी के दिन से सर्दी कम होने लगती है और बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। वसंत ऋतु नई ऊर्जा, जोश, उत्साह और उमंग का प्रतीक है। वसंत ऋतु जीवन में रौनक का प्रतीक है।
3- वसंत पर विद्यारंभ संस्कार का महत्व
वसंत पंचम पर छोटे बच्चों के लिए विद्यारंभ संस्कार का खास महत्व होता है। इस दिन छोटे बच्चों से पहली बार अक्षर लिखवाया जाता है। इसे बहुत ही शुभ माना जाता है।
4- वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
वसंत पंचमी पर पीले रंगों का विशेष महत्व होता है। पीला रंग विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को बहुत ही प्रिय होता है। इसलिए वसंत पंचमी के दिन पूजा में पीले फूल, पीले रंग के कपड़े, पीला तिलक लगाने की परंपरा होती है। पीला रंग ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक होता है।
5- वसंत पंचमी पर कामदेव और रति की पूजा
शास्त्रों में वसंत को सभी ऋतुओं का राजा बताया गया है, इस मौसम में ऋतु परिवर्तन हर तरफ दिखाई देना लगता है। ऐसी मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के साथ कामदेव और उनकी प्रिया रति की भी पूजा की जाती है। वसंत पंचमी के दिन ही कामदेव और रति ने पहली बार मानव ह्रदय में प्रेम और आकर्षण का संचार किया था। इस दिन कामदेव और रति के पूजन का उद्देश्य दांपत्त्य जीवन को सुखमय बनाना है। शास्त्रों में कामदेव को प्रेम का देवता और ऋतुराज बसंत का मित्र कहा गया है।
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6- वसंत पंचमी एक अबूझ मुहूर्तज्योतिष शास्त्र में वसंत पंचमी को एक अबूझ मूहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन किसी भी तरह के शुभ कार्यों को करने में मुहूर्त का विचार नहीं किया जाता है। ऐसे में इस दिन बिना मुहूर्त के शुभ काम जैसे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार आदि किए जा सकते हैं।
7- वसंत पंचमी पर कला और संगीत की देवी की पूजा
वसंत पंचमी का पर्व कला के क्षेत्र में कार्यरत कलाकार, गायक और संगीतकारों के लिए विशेष होता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ सभी तरह के वाद्ययंत्रों की भी पूजा करने का विधान होता है।
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8- वसंत पंचमी पर होली की शुरुआतवसंत पंचमी के दिन से होली की शुरुआत हो जाती है। इस तरह से वसंत पंचमी के दिन होली पर्व की शुरुआत मानी जाती है।
9 शिव-पार्वती से जुड़ी कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी पर भगवान शिव को तिलक किया गया है इस कारण से इस खास महत्व है। ऐसी मान्यता है इस दिन से शिव-पार्वती के विवाह की तैयारी का दिन है।
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10 वसंत पंचमी पर प्रसाद का वितरणवसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा के बाद प्रसाद वितरण करने का खास महत्व होता है। इस दिन पीले चावल, पीले पकवान और मालपुआ का प्रसाद वितरण किया जाता है।
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