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Basant Panchami 2026 Katha: आज वसंत पंचमी पर जरूर पढ़ें सरस्वती माता की पावन कथा, जीवन में मिलेगी सफलता

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 23 Jan 2026 06:10 AM IST
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सार

Basant Panchami Katha: आज वसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जा रही है। यह दिन मां सरस्वती को समर्पित है। पूजा-अर्चना और कथा से बुद्धि और सफलता प्राप्त होती है। भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले मां सरस्वती की पूजा की थी। घर और स्कूलों में विशेष रूप से सरस्वती पूजा होती है।

Basant Panchami 2026 Katha Story of Goddess Saraswati to Bring Wisdom and Prosperity in hindi
वसंत पंचमी 2026 कथा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Basant Panachami 2026 Katha: आज माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को पूरे भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ वसंत पंचमी मनाई जा रही है। यह दिन विशेष रूप से विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। लोग आज अपने घरों और विद्यालयों में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करके उनकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं और ज्ञान व बुद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

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मान्यता है कि आज के दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था और इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले मां सरस्वती की पूजा की थी। आज के पावन दिन की कथा और पूजा से जुड़ी बातें जानना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन में बुद्धि, समझ और सफलता प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।
Saraswati Puja 2026: वसंत पंचमी पर ही क्यों होती है सरस्वती पूजा? शास्त्रों में छिपा है गूढ़ रहस्य

Basant Panchami 2026 Katha Story of Goddess Saraswati to Bring Wisdom and Prosperity in hindi
वसंत पंचमी 2026 कथा - फोटो : amar ujala

पहली कथा: ब्रह्मा जी द्वारा देवी सरस्वती का प्राकट्य 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, तब चारों ओर मौन और नीरवता व्याप्त थी। मनुष्य, पशु-पक्षी तो थे, लेकिन सृष्टि में न तो वाणी थी और न ही कोई ध्वनि। यह देखकर ब्रह्मा जी को लगा कि सृष्टि में अभी कुछ महत्वपूर्ण अभाव है, जिससे जीवन पूर्ण नहीं हो पा रहा है।

तभी भगवान ब्रह्मा ने अपनी दिव्य शक्ति से एक अद्भुत देवी को प्रकट किया। देवी के चार भुजाएं थीं। उनके एक हाथ में वीणा थी, दूसरे हाथ में वर मुद्रा, जबकि शेष दो हाथों में पुस्तक और माला शोभायमान थीं। देवी श्वेत वस्त्र धारण किए हुए थीं और हंस पर विराजमान थीं, जो विवेक और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

भगवान ब्रह्मा ने देवी से वीणा वादन करने का आग्रह किया। जैसे ही देवी ने वीणा के तारों को स्पर्श किया, पूरी सृष्टि में नाद गूंज उठा। जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हुई, नदियां कलकल करने लगीं और चारों ओर संगीत, ज्ञान और चेतना का संचार हो गया। सृष्टि में संवाद और अभिव्यक्ति का जन्म इसी क्षण हुआ।

इस दिव्य स्वरूप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने देवी को ‘सरस्वती’ नाम दिया। उन्हें वागीश्वरी, वाग्देवी, शारदा, भगवती और वीणावादिनी जैसे अनेक नामों से भी जाना गया। देवी सरस्वती विद्या, बुद्धि, विवेक और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।

मान्यता है कि जिस दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ, वह माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। इसी कारण इस दिन को सरस्वती प्रकट उत्सव के रूप में मनाया जाता है और आगे चलकर यही तिथि वसंत पंचमी के नाम से प्रसिद्ध हुई। इस दिन मां सरस्वती की पूजा कर विद्या और ज्ञान की कामना की जाती है।

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वसंत पंचमी 2026 कथा - फोटो : amar ujala

दूसरी कथा: श्री कृष्ण ने सबसे पहले किया था सरस्वती मां का पूजन

बहुत कम लोगों को यह ज्ञात है कि मां सरस्वती की आराधना की परंपरा की शुरुआत स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। इसके पीछे एक सुंदर और भावपूर्ण पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, जब मां सरस्वती ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का दर्शन किया, तो वे उनके रूप और व्यक्तित्व से अत्यंत प्रभावित हो गईं और उन्हें अपने पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की।

भगवान श्रीकृष्ण ने विनम्रता से मां सरस्वती को समझाया कि वे राधा रानी के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं। इसके बाद उन्होंने मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए एक विशेष वरदान दिया। श्रीकृष्ण ने कहा कि जो भी व्यक्ति जीवन में विद्या, बुद्धि और ज्ञान की कामना करेगा, वह माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आपकी पूजा करेगा।

अपने इस वचन को निभाते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने सबसे पहले उसी तिथि पर मां सरस्वती की विधिवत पूजा की। तभी से वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की आराधना की परंपरा चली आ रही है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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