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Jalabhishek: जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में है ये बड़ा अंतर, जानें इसके लाभ और विधि

Fri, 24 Jul 2026 01:33 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Fri, 24 Jul 2026 01:33 PM IST
सार

Jalabhishek Kaise Kare: सावन में अधिकांश शिवभक्त जलाभिषेक अवश्य करते हैं। विशेष इच्छाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक कराया जाता है, जिसमें कई बार पंचामृत का उपयोग भी शामिल होता है। आइए समझते हैं इन तीनों अभिषेकों के बीच का अंतर।

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Jalabhishek aur rudrabhishek mein kya antar hai panchamrit abhishek kaise kare
जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में अंतर - फोटो : AI

Jalabhishek Rudrabhishek Difference: सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पूरे समय में श्रद्धालु भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न धार्मिक उपाय करते हैं। मान्यता है कि यह महीना शिव जी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए भक्त व्रत, पूजा, स्नान, दान, जप, कांवड़ यात्रा, जल चढ़ाना, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक जैसे अनुष्ठानों के माध्यम से उनकी कृपा पाने का प्रयास करते हैं। ऐसा विश्वास है कि महादेव की कृपा मात्र से ही जीवन के कष्ट दूर हो सकते हैं। यही वजह है कि सावन में अधिकांश शिवभक्त जलाभिषेक अवश्य करते हैं। विशेष इच्छाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक कराया जाता है, जिसमें कई बार पंचामृत का उपयोग भी शामिल होता है। आइए समझते हैं इन तीनों अभिषेकों के बीच का अंतर।



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Jalabhishek aur rudrabhishek mein kya antar hai panchamrit abhishek kaise kare
जलाभिषेक क्या है? - फोटो : adobe stock

जलाभिषेक क्या है?
जलाभिषेक का अर्थ है भगवान शिव का जल से स्नान कराना। यह सबसे सरल और प्रचलित पूजा विधि है, जिसे कोई भी भक्त रोजाना कर सकता है। इसके लिए एक पात्र में स्वच्छ जल लेकर उसमें थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत, पुष्प और बेलपत्र मिलाया जाता है। फिर “ॐ नमः शिवाय” जैसे मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। यदि संभव न हो तो केवल जल से भी अभिषेक किया जा सकता है। यह विधि मन को शांति देती है और शिव कृपा प्राप्त करने का आसान माध्यम मानी जाती है।
 

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रुद्राभिषेक क्या होता है? - फोटो : amar ujala

रुद्राभिषेक क्या होता है?
रुद्राभिषेक, जलाभिषेक की तुलना में अधिक विधि-विधान वाला अनुष्ठान है। इसे सामान्य दिनों में रोजाना नहीं किया जाता, लेकिन सावन महीने में इसे किसी भी दिन किया जा सकता है क्योंकि इस दौरान हर दिन शिववास माना जाता है। अन्य महीनों में रुद्राभिषेक के लिए शुभ तिथि और समय का ध्यान रखना जरूरी होता है। इस अभिषेक में गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, गन्ने का रस या गुड़ आदि का प्रयोग किया जाता है। चूंकि इसमें विशेष मंत्रों और नियमों का पालन जरूरी होता है, इसलिए इसे किसी योग्य पंडित या विद्वान के मार्गदर्शन में कराना बेहतर माना जाता है।
 

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पंचामृत अभिषेक क्या है? - फोटो : adobe stock

पंचामृत अभिषेक क्या है?
पंचामृत अभिषेक, रुद्राभिषेक का ही एक रूप है। इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है और उसी से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। यह प्रक्रिया भी रुद्राभिषेक के नियमों के अनुसार ही की जाती है और इसे विशेष फलदायी माना जाता है।

अभिषेक से मिलने वाले लाभ
जब व्यक्ति जीवन में बीमारी, मानसिक तनाव, ग्रह दोष, आर्थिक समस्या, पारिवारिक कलह या अन्य बाधाओं से परेशान होता है, तब जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना लाभकारी माना जाता है। इन अनुष्ठानों से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है, और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
 

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रुद्राभिषेक कब कराना चाहिए? - फोटो : adobe stock

रुद्राभिषेक कब कराना चाहिए?
रुद्राभिषेक के लिए महाशिवरात्रि का दिन सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा सावन के पूरे महीने में, विशेष रूप से सावन सोमवार, सावन शिवरात्रि और प्रदोष व्रत के दिन इसे कराया जा सकता है। अन्य महीनों में भी शिवरात्रि, प्रदोष या शुभ सोमवार के दिन रुद्राभिषेक करना फलदायी माना जाता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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