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Ashadh Purnima Vrat 2026: आषाढ़ पूर्णिमा कब है? जानें तिथि, पूजा विधि, चंद्रोदय और व्रत का धार्मिक महत्व

Thu, 23 Jul 2026 01:45 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 23 Jul 2026 01:45 PM IST
सार

आषाढ़ पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, चंद्र देव और महर्षि वेदव्यास की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 2026 की सही तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय।

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Ashadh Purnima Vrat 2026 Date Puja Vidhi Moonrise Time and Significance
आषाढ़ पूर्णिमा व्रत - फोटो : amar ujala

Aashadh Purnima Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रत्येक पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, लेकिन आषाढ़ पूर्णिमा का स्थान सबसे पवित्र पूर्णिमाओं में से एक है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ चंद्र देव की आराधना और महर्षि वेदव्यास का स्मरण किया जाता है। यही कारण है कि आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, विधिपूर्वक पूजा करने, चंद्रमा को अर्घ्य देने और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 2026 की तिथि, चंद्रोदय का समय, शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि।

Ashadh Purnima Vrat 2026 Date Puja Vidhi Moonrise Time and Significance
आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 2026 - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

कब है आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 2026?

  • आषाढ़ पूर्णिमा तिथि का आरंभ:  28 जुलाई, मंगलवार, सायं 6:18 बजे 
  • आषाढ़ पूर्णिमा तिथि का समापन: 29 जुलाई ,बुधवार, रात्रि 8:05 बजे 
  • आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 29 जुलाई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
Ashadh Purnima Vrat 2026 Date Puja Vidhi Moonrise Time and Significance
चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त - फोटो : AI
चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त
  • 29 जुलाई , सायं 7:21 बजे चंद्रमा का उदय होगा।
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:17 बजे से प्रारंभ होगा।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:43 बजे तक
इस दौरान स्नान, पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
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आषाढ़ पूर्णिमा पूजा विधि - फोटो : Adobe Stock

आषाढ़ पूर्णिमा पूजा विधि

  • आषाढ़ पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • यदि किसी पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
  • इसके बाद स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और यदि संभव हो तो महर्षि वेदव्यास या अपने गुरु के चित्र अथवा प्रतिमा की स्थापना करें।
  • धूप, दीप, पुष्प, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, मौसमी फल और प्रसाद अर्पित करें। भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें तथा गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • शाम को चंद्रोदय के समय चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि, मानसिक शांति तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना करें।
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पूर्णिमा पर करें ये शुभ कार्य - फोटो : Freepik

पूर्णिमा पर करें ये शुभ कार्य

  • आषाढ़ पूर्णिमा पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।
  • इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, जल, गौसेवा, धार्मिक ग्रंथ या धन का दान करना शुभ माना जाता है।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
  • यदि संभव हो तो इस दिन गुरुजनों, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करें तथा उनका आशीर्वाद लें।
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ, विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या गुरु स्तुति का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
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