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Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु रहेंगे चार माह तक योग निद्रा में, जानिए पूजा के नियम
Wed, 22 Jul 2026 04:03 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 22 Jul 2026 04:03 PM IST
सार
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में होते हैं और इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन अपने कंधों में लेते हैं।
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देवशयनी एकादशी का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना है। एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा होती है। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में क्षीर सागर में चले जाते हैं। इन चार महीनों के दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। इसके अलावा चार महीने यानी चातुर्मास के दौरान कई तरह के कार्य वर्जित होते हैं। वहीं इस दौरान कई तरह के कार्य करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं क्या करें।
देवशयनी एकादशी 2026 कब है
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई है और इस दिन के बाद भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में होते हैं, जो कार्तिक माह के देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। ऐसे में इस दौरान चार महीनों तक भगवान विष्णु पूजा, जप, तप और दान करते हुए भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
देवशयनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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चातुर्मास का महत्व
हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को भगवान विष्णु का शयनकाल कहा जाता है। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के समय सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए चातुर्मास के चार महीनों में भगवान शिव की आराधना, मंत्र-जप, रुद्राभिषेक, दान-पुण्य और धार्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है। इस अवधि में किए गए व्रत, तप और भक्ति से आध्यात्मिक उन्नति के साथ पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास में क्या करें
चातुर्मास में कई कठिन नियमों का पालन करने की परंपरा होती है। चातुर्मास देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक देवउठनी एकादशी तक विशेष नियमों का पालन करना होगा। इन चार महीनों के दौरान शुभ कार्यो को करना वर्जित होता है। इस दौरान भूमि पर शयन करना होगा। इसमें चार महीने तक एक ही स्थान पर रखते हुए पूजा-पाठ, जप, तप और धार्मिक कार्य किया जाते हैं। चातुर्मास में दीपदान करने का विशेष महत्व होता है। इन चार महीनों तक गरीबों को भोजन और अनाज का दान करना शुभ होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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देवशयनी एकादशी 2026 कब है
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई है और इस दिन के बाद भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में होते हैं, जो कार्तिक माह के देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। ऐसे में इस दौरान चार महीनों तक भगवान विष्णु पूजा, जप, तप और दान करते हुए भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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देवशयनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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चातुर्मास का महत्व
हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को भगवान विष्णु का शयनकाल कहा जाता है। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के समय सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए चातुर्मास के चार महीनों में भगवान शिव की आराधना, मंत्र-जप, रुद्राभिषेक, दान-पुण्य और धार्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है। इस अवधि में किए गए व्रत, तप और भक्ति से आध्यात्मिक उन्नति के साथ पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास में क्या करें
चातुर्मास में कई कठिन नियमों का पालन करने की परंपरा होती है। चातुर्मास देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक देवउठनी एकादशी तक विशेष नियमों का पालन करना होगा। इन चार महीनों के दौरान शुभ कार्यो को करना वर्जित होता है। इस दौरान भूमि पर शयन करना होगा। इसमें चार महीने तक एक ही स्थान पर रखते हुए पूजा-पाठ, जप, तप और धार्मिक कार्य किया जाते हैं। चातुर्मास में दीपदान करने का विशेष महत्व होता है। इन चार महीनों तक गरीबों को भोजन और अनाज का दान करना शुभ होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।