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Chaturmas 2026: कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास, जानिए इस दौरान क्या करें और क्या नहीं

Mon, 20 Jul 2026 02:58 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 20 Jul 2026 02:58 PM IST
सार

Chaturmas 2026: चातुर्मास में भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में रहते हैं। इस दौरान सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं। 

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Chaturmas 2026: देवशयनी एकादशी पर शुरू होगा चातुर्मास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chaturmas 2026: हिंदू धर्म में हर एक तिथि और व्रत का विशेष महत्व होता है। जिसमें चातुर्मास को बहुत ही शुभ, पवित्र और आध्यात्मिक साधना का काल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और देवउठनी एकादशी पर योगनिद्रा का त्यागकर फिर से सृष्टि के संचालन का कार्यभार संभालते हैं। चातुर्मास शुरू होने के बाद इन चार महीनों के दौरान विवाह, गृहप्रवेश और दूसरे तरह के मांगलिक कार्यों की मनाई हो जाती है। वहीं शुभ कार्य के वर्जित होने पर पूजा-पाठ, जप-तप, दान और व्रत का विशेष महत्व बढ़ जाता है। चातुर्मास में पूजा, जप-तप करने से से कई गुने फल की प्राप्ति होती है। इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाएगी। 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागेंगे और चातुर्मास खत्म हो जाएगा। आइए जानते हैं चातुर्मास में में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

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चातुर्मास में क्या करें

  • - चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु के जुड़े मंत्रों का जाप करें।
  • - इन चार महीनों के दौरान हर एक दिन भगवान विष्णु ,माता लक्ष्मी और तुलसी की पूजा करें।
  • - इस दौरन विष्णु सहस्त्रनाम, गीता और रामचरितमानस का पाठ करें।
  • - चातुर्मास में दान करने का विशेष महत्व है ऐसे में इस दिन अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
  • - चातुर्मास में गुस्से, अंहकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • - एकादशी व्रत के दिन भजन-कीर्तन करना चाहिए। 


चातुर्मास में क्या नहीं करें 

  • - चातुर्मास में शुभ और मांगलिक कार्यो को करने से बचना चाहिए।
  • - इन चार महीनों के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और दूसरे शुभ मांगलिक कार्यों को करने से बचें।
  • - चातुर्मास मे तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए। 
  • - इस दौरान झूठ, छल कपट और अनावश्यक वाद-विवादों से बचें। 


चातुर्मास का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी के दौरान चातुर्मास में आत्मसंयम, भक्ति और साधना का समय माना जाता है। चातुर्मास के दौरान साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर जप, तप और साधना करते हैं। चातुर्मास में शुभ कार्य वर्जित माना जाता है और इस दिन भगवान विष्णु की उपासन,  मंत्रों का जाप, गीता और रामचरित्र मानस का पाठ करना बहुत ही लाभकारी माना जाता है। इस माह में दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना जाता है। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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