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Nirjala Ekadashi 2026: गुरुवार को रखा जाएगा निर्जला एकादशी, शिव और सिद्ध योग में होगा व्रत-पूजन

पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य Published by: ज्योति मेहरा Updated Tue, 23 Jun 2026 05:15 PM IST
सार

Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी को 'भीमसेनी एकादशी' भी कहते हैं। इस दिन बिना जल और अन्न के उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आइए इस व्रत के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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Nirjala Ekadashi 2026 Date and significance auspicious Shiva and Siddha Yog
Nirjala Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

Nirjala Ekadashi 2026 Date: एकादशी 24 जून को शाम 6:13 बजे शुरू होगी। समापन 25 जून को रात 8:09 बजे होगा। उदयातिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि है) के अनुसार 25 जून गुरुवार को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रातः काल 10 बजकर 54 मिनट तक शिव योग रहेगा इसके पश्चात सिद्ध योग रहेगा। निर्जला एकादशी पर शिव योग और सिद्ध योग का संयोग अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जाता है। इन योगों के प्रभाव से भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है, जिससे साधक को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


 

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भीमसेनी एकादशी महत्व - फोटो : freepik

भीमसेनी एकादशी महत्व
निर्जला एकादशी को 'भीमसेनी एकादशी' भी कहते हैं। इस दिन बिना जल और अन्न के उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य देने वाला यह व्रत स्वास्थ्य और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व रखता है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है और इसकी महिमा शास्त्रों में अत्यंत विस्तार से वर्णित की गई है। मान्यता है कि जो साधक श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान फल प्राप्त होता है।

निर्जला एकादशी आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और दान का दिव्य पर्व है। यह दिन साधक को भगवान विष्णु की विशेष कृपा, पापों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग प्रदान करता है।
 

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पैराणिक कथा - फोटो : amar ujala

पैराणिक कथा
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाबली भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे, इसलिए महर्षि वेदव्यास ने उन्हें वर्ष भर की सभी एकादशियों के फल की प्राप्ति हेतु केवल एक निर्जला एकादशी का व्रत रखने का उपदेश दिया था। तभी से यह एकादशी विशेष रूप से भीमसेन एकादशी के नाम से भी विख्यात हुई।
 

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क्या है निर्जला का मतलब? - फोटो : अमर उजाला

क्या है निर्जला का मतलब?
निर्जला शब्द का अर्थ है बिना जल के। इस दिन साधक सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तक अन्न और जल दोनों का त्याग करता है। यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, परंतु इसकी महिमा भी उतनी ही महान है।

निर्जला व्रत अत्यंत कठिन होता है क्योंकि इसमें जल तक ग्रहण नहीं किया जाता। यदि किसी साधक का स्वास्थ्य ठीक न हो, वृद्धावस्था हो, गर्भवती महिला हों या चिकित्सकीय समस्या हो, तो वे केवल पूजा, जप और दान-पुण्य करके भी इस व्रत का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि सनातन धर्म में भावना और श्रद्धा को सर्वोपरि माना गया है।
 

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क्या है निर्जला का मतलब? - फोटो : अमर उजाला

निर्जला एकादशी भगवान विष्णु की उपासना, आत्मसंयम और दान का महापर्व है। यह व्रत जीवन में पुण्य, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। इस पावन अवसर पर व्रत, पूजा और अन्नदान करके साधक श्रीहरि की कृपा का पात्र बनता है।

दान का महात्म्य: इस दिन विशेष रूप से जल से भरा घड़ा (कलश), छाता, वस्त्र, फल और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है। 

भगवान विष्णु उपासना: भगवान विष्णु के 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 

पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य

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