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Bada Mangal: बड़ा मंगल का व्रत रखा है तो जान लें उद्यापन के नियम और सही समय, तभी मिलेगा पूरा फल

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Tue, 23 Jun 2026 12:40 PM IST
सार

Bada Mangal Vrat Udyapan: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब निर्धारित संख्या में व्रत पूरे हो जाएं, तो अंतिम मंगलवार को पूरे विधि-विधान से पूजा कर उद्यापन करना चाहिए। ऐसा करने से साधक को अपने व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है और हनुमान जी की विशेष कृपा जीवन में बनी रहती है।

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Bada Mangal Vrat samapt karne ka sahi niyam mangalwar vrat udyapan vidhi in hindi
मंगलवार व्रत का उद्यापन कैसे करें? - फोटो : AI

Bada Mangal Vrat Udyapan 2026: ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले बड़े मंगल का धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान हनुमान की विधिपूर्वक पूजा करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं। कई लोग 11, 21 या उससे अधिक मंगलवारों तक व्रत करने का संकल्प लेते हैं। हालांकि, अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि व्रत का समापन सही तरीके से करना भी उतना ही जरूरी है जितना उसे रखना। इस समापन प्रक्रिया को ‘उद्यापन’ कहा जाता है, जिसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है।



धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब निर्धारित संख्या में व्रत पूरे हो जाएं, तो अंतिम मंगलवार को पूरे विधि-विधान से पूजा कर उद्यापन करना चाहिए। ऐसा करने से साधक को अपने व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है और हनुमान जी की विशेष कृपा जीवन में बनी रहती है।

उद्यापन क्यों है जरूरी?
यदि आपने किसी निश्चित संख्या में बड़ा मंगल व्रत करने का संकल्प लिया है, तो उसके पूर्ण होने पर उद्यापन करना आवश्यक है। इसे व्रत की पूर्णाहुति माना जाता है। बिना उद्यापन के व्रत का फल अधूरा रह सकता है, इसलिए अंतिम मंगलवार को इस प्रक्रिया को अवश्य पूरा करना चाहिए।

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उद्यापन की पूजा विधि - फोटो : adobe stock

उद्यापन की पूजा विधि

  • उद्यापन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, विशेष रूप से लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें। 
  • इसके बाद पूजा स्थान को साफ करें और वहां लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • पूजा के दौरान सिंदूर, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। 
  • दीपक जलाकर आरती करें और हनुमान जी को चमेली का तेल अर्पित करना न भूलें, क्योंकि यह उन्हें अत्यंत प्रिय माना जाता है।


भोग में क्या चढ़ाएं

  • उद्यापन के दिन भगवान हनुमान को विशेष भोग लगाना शुभ माना जाता है। 
  • बूंदी या बेसन के लड्डू, चूरमा, गुड़ और चना अर्पित करना उत्तम रहता है। 
  • परंपरा के अनुसार, सवा किलो (लगभग 1.25 किलो) प्रसाद चढ़ाना विशेष फलदायी माना गया है। 
  • इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
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दान-पुण्य का महत्व - फोटो : adobe stock

दान-पुण्य का महत्व
उद्यापन के दिन दान का विशेष महत्व होता है। अपनी क्षमता के अनुसार 5, 7 या 11 जरूरतमंद लोगों या ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा दें। लाल वस्त्र दान करना भी शुभ माना जाता है। यदि संभव हो, तो भंडारे का आयोजन करें या मंदिर में प्रसाद वितरण करें। साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए जल, शरबत या फल वितरित करना भी पुण्यदायी माना जाता है।

बंदरों को भोजन कराना
हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन बंदरों को गुड़, चना या केले खिलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाले कष्ट कम होते हैं।
 

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व्रत का पारण कैसे करें - फोटो : adobe stock

इन बातों का रखें ध्यान
उद्यापन के दिन घर और मंदिर की साफ-सफाई का ध्यान रखें। सात्विक आहार और व्यवहार अपनाएं, क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें। जरूरतमंदों की मदद करें और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी शुभ माना जाता है।

व्रत का पारण कैसे करें
शाम की पूजा, दान और प्रसाद वितरण के बाद व्रत का पारण करें। पारण के समय केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें और लहसुन-प्याज से परहेज करें। कई लोग इस दिन नमक का सेवन भी नहीं करते और प्रसाद ग्रहण करके ही व्रत समाप्त करते हैं।

 

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क्या उद्यापन के बाद व्रत जारी रख सकते हैं? - फोटो : adobe stock

क्या उद्यापन के बाद व्रत जारी रख सकते हैं?
उद्यापन के बाद व्रत का संकल्प पूर्ण हो जाता है, लेकिन यदि कोई श्रद्धालु अपनी आस्था के चलते आगे भी व्रत रखना चाहता है, तो वह नया संकल्प लेकर इसे जारी रख सकता है। इस प्रकार विधिपूर्वक किया गया उद्यापन न केवल व्रत को पूर्णता देता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी लाता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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