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शनि प्रदोष व्रत से साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से मिलती है मुक्ति, जानिए महत्व और पूजा शुभ मुहूर्त

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Tue, 23 Jun 2026 09:04 AM IST
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सार

Shani Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में शनि प्रदोष व्रत रखने से शनि से संबंधित दोषों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा हासिल होती है। 

shani pradosh vrat 2026 kab hai time shubh muhurat puja vidhi and shani sade remedies
शनि प्रदोष व्रत उपाय - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

Shani Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत हर माह में दो बार आता है। एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में। शिव पुराण में प्रदोष व्रत रखने का विशेष महत्व बताया गया है। जिसमें इस व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने का महत्व और विधान बताया है। प्रदोष व्रत में दिनभर व्रत रखते हुए शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करने से सुख, वैभव और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सभी तरह की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। जब शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है उसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। 



शनि प्रदोष व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त 2026
इस वर्ष ज्येष्ठ माह शनि प्रदोष व्रत 27 जून को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जून को रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 28 जून को देर रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगी। उदया तिथि के आधार पर शनि प्रदोष व्रत 27 जून शनिवार के दिन रखा जाएगा। शनि प्रदोष पर पूजा के मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। जो लोग शनि प्रदोष व्रत रखते हैं उनके लिए पूजा का समय शाम 7 बजकर 23 मिनट से होगा और इसका समापन रात 09 बजकर 23 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। 
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शनि प्रदोष व्रत से साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से मिलता है छुटकारा
प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा मिलती है। इसके अलावा जब शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है तो शनिदेव की भी विशेष कृपा रहती है। शनि प्रदोष व्रत रखने और शनिदेव की पूजा करने से शनिदोष, ढैय्या और साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। कुंडली में शनि दोष होने पर इसके अशुभ प्रभावों से छुटकारा हासिल होता है। इसके अलावा शनि प्रदोष व्रत करने से आरोग्यता भी प्राप्ति होती है। वहीं जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु और कालसर्प दोष होता है, शनि प्रदोष व्रत रखने से उनको इसके अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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