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Nirjala Ekadashi 2026: कब है निर्जला एकादशी, कैसे करें व्रत और पूजा, जानें धार्मिक मान्यता और महत्व

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Tue, 23 Jun 2026 07:42 AM IST
सार

निर्जला एकादशी 2026 का पावन व्रत 25 जून को रखा जाएगा। इस दिन एकादशी तिथि का शुभ आरंभ और समापन समय विशेष महत्व रखता है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस व्रत में उपवास, पूजा और तुलसी अर्चना का विशेष विधान बताया गया है। जानें एकादशी का शुभ मुहूर्त, व्रत नियम, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

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Nirjala Ekadashi 2026 Know the Vishnu-Tulsi Puja Rituals and Significance of This Sacred Fast
Nirjala Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी व्रतों में गिनी जाती है। साल 2026 में यह व्रत 25 जून को रखा जाएगा, जिसे श्रद्धा और संयम का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन बिना जल ग्रहण किए किया गया उपवास सभी एकादशियों के बराबर फल प्रदान करता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के साथ तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व होता है। भक्त इस दिन व्रत, ध्यान और दान के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की कामना करते हैं।

Nirjala Ekadashi 2026 Know the Vishnu-Tulsi Puja Rituals and Significance of This Sacred Fast
निर्जला एकादशी तिथि  - फोटो : freepik

निर्जला एकादशी तिथि 
पंचांग के अनुसार इस वर्ष निर्जला एकादशी की तिथि का निर्धारण उदयातिथि के आधार पर किया गया है। इसके अनुसार व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून 2026 को शाम 06:13 बजे से हो रहा है और इसका समापन 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे पर होगा। उदयातिथि के नियम के अनुसार व्रत का पालन 25 जून को ही किया जाएगा, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

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त्रिपुष्कर/शुभ योगों का महासंयोग - फोटो : adobe stock

त्रिपुष्कर/शुभ योगों का महासंयोग
25 जून को निर्जला एकादशी के दिन पूजा-पाठ और साधना के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाने वाले कई प्रभावशाली योग बन रहे हैं। इन योगों के कारण यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन रवि योग सुबह 05:25 बजे से लेकर शाम 04:29 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य को सिद्ध करने वाला माना जाता है। इसके बाद शिव योग सुबह 10:22 बजे से पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जो साधना और पूजा के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाला योग है। साथ ही सिद्ध योग भी सुबह 10:53 बजे से पूरे दिन बना रहेगा, जिसे कार्य सिद्धि और सफलता का कारक माना जाता है। इन तीनों योगों के संयोग से यह दिन भक्ति, पूजा और व्रत के लिए अत्यंत फलदायी बन जाता है।

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निर्जला एकादशी पूजा विधि  - फोटो : Adobe Stock

निर्जला एकादशी पूजा विधि 

  • निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर शुद्ध होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • घर के पूजा स्थान को साफ करके दीपक जलाएं और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।
  • इसके बाद पीले फूल और पीले वस्त्र अर्पित करें, जो इस व्रत में विशेष शुभ माने जाते हैं।
  • भगवान को सात्विक भोग अर्पित करें और उसमें तुलसी दल जरूर रखें, क्योंकि तुलसी के बिना भोग अधूरा माना जाता है।
  • इसके साथ माता लक्ष्मी की भी श्रद्धापूर्वक आरती करनी चाहिए और पूरे दिन भक्ति भाव से भगवान विष्णु के मंत्रों का जप और स्मरण करना चाहिए।
  • अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय के बाद पुनः पूजा करें। फिर गरीबों या ब्राह्मणों को दान या भोजन कराकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हुए व्रत का पारण करें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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