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Nirjala Ekadashi 2026: गर्भवती महिलाओं के लिए क्या है निर्जला एकादशी व्रत के नियम? जानें पूजा विधि

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 24 Jun 2026 01:39 PM IST
सार

Pregnant Women Ekadashi Vrat Rules: धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो गर्भवती महिलाएं भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकती हैं, लेकिन कठोर निर्जला व्रत करना अनिवार्य नहीं है। आइए जानते हैं गर्भवती महिलाओं के लिए व्रत के क्या नियम है।

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Nirjala Ekadashi 2026 pregnant women vrat rules garbhavastha mei ekadashi vrat kaise rakhe
निर्जला एकादशी व्रत कथा - फोटो : AI

Nirjala Ekadashi Vrat Rules For Pregnant Women: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है और इसे सभी एकादशियों में सबसे कठिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और नियमपूर्वक व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी।



इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पूरे दिन अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के लिए इस व्रत का पालन सामान्य लोगों की तुलना में अलग तरीके से करने की सलाह दी जाती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर को अतिरिक्त पोषण और पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए बिना जल के व्रत रखना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है।

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क्या गर्भवती महिलाएं निर्जला एकादशी का व्रत रख सकती हैं? - फोटो : adobestock

क्या गर्भवती महिलाएं निर्जला एकादशी का व्रत रख सकती हैं?
धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो गर्भवती महिलाएं भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकती हैं, लेकिन कठोर निर्जला व्रत करना अनिवार्य नहीं है। इस अवस्था में मां और गर्भ में पल रहे शिशु का स्वास्थ्य सर्वोपरि होता है। यदि महिला पूरी तरह स्वस्थ है और चिकित्सक की अनुमति मिल जाती है, तभी वह व्रत रखने के बारे में सोच सकती है। वहीं, अगर महिला को कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, चक्कर या उल्टी जैसी समस्याएं हैं, तो उसे निर्जला व्रत करने से बचना चाहिए।
 

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फलाहार व्रत एक बेहतर विकल्प - फोटो : adobe stock

फलाहार व्रत एक बेहतर विकल्प
गर्भवती महिलाओं के लिए निर्जला एकादशी पर फलाहार व्रत रखना अधिक सुरक्षित माना जाता है। व्रत का मूल उद्देश्य भगवान के प्रति श्रद्धा और मन की पवित्रता होता है, इसलिए कठोर नियमों का पालन करना जरूरी नहीं है। इस दिन फल, दूध, नारियल पानी, सूखे मेवे या हल्का सात्विक भोजन लिया जा सकता है। इससे शरीर को जरूरी पोषण मिलता रहेगा और पूजा भी श्रद्धा के साथ की जा सकेगी।

पूजा विधि
निर्जला एकादशी के दिन गर्भवती महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें। पूजा स्थान पर दीपक जलाकर भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या व्रत कथा का पाठ या श्रवण भी लाभकारी होता है।
 

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व्रत के दौरान सावधानियां - फोटो : Amar Ujala

व्रत के दौरान सावधानियां
गर्भावस्था में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि व्रत के दौरान कमजोरी, चक्कर या असहजता महसूस हो, तो तुरंत आराम करें और जरूरत पड़ने पर पानी या भोजन ग्रहण करें। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर शिशु पर भी पड़ता है। इसलिए भक्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।

किन महिलाओं को व्रत नहीं रखना चाहिए?
जिन गर्भवती महिलाओं को लो ब्लड प्रेशर, शुगर, एनीमिया, बार-बार उल्टी या डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हैं, उन्हें निर्जला व्रत से दूरी बनानी चाहिए। यदि डॉक्टर ने विशेष आहार या दवाइयां लेने की सलाह दी है, तो व्रत रखने के बजाय पूजा, मंत्र जाप और दान करना ही उचित होता है।
 

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इन उपायों से भी मिलेगा पुण्य - फोटो : adobestock

इन उपायों से भी मिलेगा पुण्य 
अगर कोई गर्भवती महिला निर्जला व्रत नहीं रख पा रही है, तो भी वह भगवान विष्णु की पूजा करके पुण्य प्राप्त कर सकती है। तुलसी दल अर्पित करना, मंत्र जाप करना, जरूरतमंदों को दान देना और सात्विक जीवनशैली अपनाना भी उतना ही फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और आस्था ही सबसे बड़ा धर्म है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। इस सूचना और तथ्यों की सटीकता एवं संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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