Parama Ekadashi 2026: अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परम एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस साल यह व्रत 11 जून 2026 को रखा जा रहा है। इस तिथि पर रेवती नक्षत्र और शोभन योग का संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परम एकादशी हर तीन वर्ष में एक बार आती है, इसलिए इस तिथि पर पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों की मानें, तो परम एकादशी परभगवान विष्णु की पूजा और विष्णु चालीसा का पाठ करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। साथ ही सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। इसके प्रभाव से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आइए इस शक्तिशाली चालीसा के पाठ से जुड़े लाभ नियमों को जानते हैं।
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Parama Ekadashi 2026: परम एकादशी पर करें यह एक उपाय, प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु और मिलेगा शुभ फल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Megha Kumari
Updated Wed, 10 Jun 2026 04:17 PM IST
सार
Parama Ekadashi 2026: परमा एकादशी पर शोभन और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इस योग में पूजा-पाठ करना बेहद शुभ हो सकता है। साथ ही सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
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परम एकादशी 2026
- फोटो : AI
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परमा एकादशी 2026
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परम एकादशी पर करें यह विशेष उपाय
परम एकादशी के विष्णु की विधिवत पूजा करें। केले का भोग लगाएं और तुलसी दल मिठाई अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक विष्णु चालीसा का पाठ करें।
परम एकादशी पर विष्णु चालीसा पाठ के लाभ
परम एकादशी के विष्णु की विधिवत पूजा करें। केले का भोग लगाएं और तुलसी दल मिठाई अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक विष्णु चालीसा का पाठ करें।
परम एकादशी पर विष्णु चालीसा पाठ के लाभ
- धन और आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बनते हैं।
- व्रत का संपूर्ण और शुभ फल प्राप्त होता है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।
- कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होने लगती है।
- विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने के संकेत मिलते हैं।
- संतान संबंधी परेशानियों से राहत मिलने की संभावना रहती है।
- घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में उन्नति और सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
परमा एकादशी 2026
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विष्णु चालीसा
दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥
चौपाई
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥
चौपाई
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
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परमा एकादशी 2026
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परमा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- व्रत तिथि: 11 जून 2026
- उत्तम शुभ मुहूर्त: सुबह 5:23 बजे से 7:07 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12:21 बजे से 2:05 बजे तक
Parama Ekadashi 2026: तीन साल में एक बार आती है ये एकादशी, विष्णु जी का आशीर्वाद पाने के लिए अपनाएं ये विधि
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।