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Mahaprasad Mystery: पुरी जगन्नाथ मंदिर का 56 भोग रहस्य, हर दिन कैसे सटीक बनता है महाप्रसाद?

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shweta Singh Updated Wed, 10 Jun 2026 01:28 AM IST
सार

जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि आस्था और समानता का प्रतीक है। जानें छप्पन भोग, अबाढ़ा महाप्रसाद, आनंद बाजार और इससे जुड़ी रोचक मान्यताओं के बारे में।

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Puri Jagannath Temple Chhappan Bhog Mystery Abadha Mahaprasad History Mystery and Significance
अबाढा भोग का महत्व - फोटो : amar ujala

Jagannath Mandir Mahaprasad: ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर केवल अपनी भव्यता और धार्मिक महत्ता के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की अनूठी परंपराओं के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मंदिर से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं हैं, जो सदियों से लोगों को आकर्षित करती रही हैं। इन्हीं में से एक है भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया जाने वाला महाप्रसाद, जिसे श्रद्धालु बेहद पवित्र और दिव्य मानते हैं। प्रतिदिन हजारों भक्त इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं, लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे केवल भोजन नहीं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। जगन्नाथ मंदिर में दिनभर अलग-अलग समय पर भगवान को कई बार भोग अर्पित किया जाता है, जिनमें छप्पन भोग का विशेष महत्व है। मंदिर की विशाल रसोई में तैयार होने वाले इस प्रसाद को 'अबाढ़ा महाप्रसाद' कहा जाता है। यह नाम अपने आप में एक गहरा आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश समेटे हुए है। आखिर इस प्रसाद को अबाढ़ा क्यों कहा जाता है, इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है और कैसे यह समानता, भाईचारे और भक्ति का प्रतीक बन गया? आइए जानते हैं जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद से जुड़े इस रोचक रहस्य और उसकी अनोखी परंपरा के बारे में।

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जगन्नाथ पुरी प्रसाद - फोटो : instagram

महाप्रभु के छप्पन भोग की अनूठी परंपरा
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाने वाले छप्पन भोग का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मंदिर की विशाल रसोई में तैयार होने वाले इन व्यंजनों को मुख्य रूप से दो वर्गों में बांटा गया है-पके हुए भोजन और सूखे अथवा मिठाई वाले प्रसाद। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है।

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इनमें मीठे चावल से लेकर खिचड़ी, सादा भात, दाल और सब्जियों के कई प्रकार शामिल हैं। - फोटो : instagram

शंखुड़ी भोग: मिट्टी के बर्तनों में पकने वाला प्रसाद
शंखुड़ी भोग में वे सभी व्यंजन शामिल होते हैं जिन्हें मंदिर की रसोई में पारंपरिक तरीके से मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है। इनमें मीठे चावल से लेकर खिचड़ी, सादा भात, दाल और सब्जियों के कई प्रकार शामिल हैं।
कनिका नामक मीठा चावल घी, गुड़ और सूखे मेवों से तैयार किया जाता है, जबकि खिचड़ी चावल, दाल और शुद्ध घी से बनती है। ओडिशा का प्रसिद्ध व्यंजन डालमा भी छप्पन भोग का अहम हिस्सा है, जिसमें दाल और कई तरह की देशी सब्जियां डाली जाती हैं। इसके अलावा बेसर, महुरा और विभिन्न प्रकार के साग भी भगवान को अर्पित किए जाते हैं।

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मालपुआ के स्थानीय रूप सना और बड़ा अमूलू भी महाप्रभु के प्रिय भोगों में गिने जाते हैं। - फोटो : Adobe stock

पीठा और पारंपरिक मिठाइयों का विशेष स्थान
छप्पन भोग में कई तरह के पीठा और पारंपरिक मिठाइयां भी शामिल होती हैं। पोड़ा पीठा, एंडुरी पीठा, आरिसा पीठा और काकरा पीठा जैसे व्यंजन ओडिशा की समृद्ध खाद्य संस्कृति की झलक दिखाते हैं। नारियल, गुड़, चावल के आटे और सूजी से तैयार ये व्यंजन स्वाद और परंपरा का अद्भुत संगम माने जाते हैं। मालपुआ के स्थानीय रूप सना और बड़ा अमूलू भी महाप्रभु के प्रिय भोगों में गिने जाते हैं।

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सूखे प्रसाद की भी है अलग पहचान - फोटो : इंस्टाग्राम

सूखे प्रसाद की भी है अलग पहचान
छप्पन भोग में कुछ ऐसे व्यंजन भी शामिल हैं जिन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। खाजा, गजा, मगाजा लड्डू और खुड़ुमा जैसे सूखे प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इनमें खास तौर पर खाजा को जगन्नाथ महाप्रसाद की पहचान माना जाता है और देश-विदेश से आने वाले भक्त इसे अपने साथ लेकर जाते हैं।

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