Adhik Maas Shivratri 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना के लिए मासिक शिवरात्रि का विशेष स्थान है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आने वाली यह तिथि भक्तों को शिव भक्ति और साधना का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करती है। हालांकि वर्ष 2026 में अधिक मास के दौरान पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस बार ज्येष्ठ अधिक मास में आने वाली शिवरात्रि पर एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसे गौरी योग कहा जाता है। लगभग 27 वर्षों बाद बन रहा यह योग इस व्रत को और अधिक फलदायी और शुभ बना रहा है।
Adhik Maas Shivratri: कब रखा जाएगा अधिक मासिक शिवरात्रि का व्रत, 27 साल बाद बनने जा रहा दुर्लभ योग
Adhik Maas Shivratri 2026: इस बार ज्येष्ठ अधिक मास में आने वाली शिवरात्रि पर एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसे गौरी योग कहा जाता है। लगभग 27 वर्षों बाद बन रहा यह योग इस व्रत को और अधिक फलदायी और शुभ बना रहा है। आइए जानते हैं अधिक मासिक शिवरात्रि किस दिन मनाई जाएगी।
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शुभ मुहूर्त का महत्व
मासिक शिवरात्रि के दिन प्रदोष काल और मध्य रात्रि का समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा दिन में भी कुछ शुभ समय ऐसे होते हैं, जब पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। सुबह 7:07 बजे से 8:51 बजे तक शुभ चौघड़िया, शाम 7:19 बजे से 8:34 बजे तक लाभ चौघड़िया और रात 11:04 बजे से 12:22 बजे तक अमृत चौघड़िया रहेगा। वहीं प्रदोष काल शाम 6:34 बजे से 8:04 बजे तक रहेगा, जो शिव पूजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
ज्योतिषीय दृष्टि से यह शिवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 1999 में बना था, जब ज्येष्ठ अधिक मास में शिवरात्रि आई थी। इस बार चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जिससे गौरी योग का निर्माण होगा। इस योग को वैवाहिक सुख, पारिवारिक समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव और पार्वती की संयुक्त पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। संभव हो तो रुद्राभिषेक भी करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें और शिव चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें।
धार्मिक महत्व
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
अधिक मास में आने वाली मासिक शिवरात्रि को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। गौरी योग के दुर्लभ संयोग के कारण वर्ष 2026 की यह शिवरात्रि भक्तों के लिए पुण्य अर्जित करने का एक अनमोल अवसर बनकर आई है।
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