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Shani Chalisa Path: शनि चालीसा पाठ करते समय करें इन नियमों का पालन, दूर होंगे सभी कष्ट

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Mehra Updated Sat, 06 Jun 2026 03:24 PM IST
सार

Shani Chalisa Path: शनिदेव को प्रसन्न करने के कई उपाय बताए गए हैं, जिनमें सबसे सरल और प्रभावी उपाय शनि चालीसा का पाठ माना जाता है। आइए जानते हैं कि शनि चालीसा का पाठ करते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए। 

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Shani Chalisa Paath Vidhi Aur Niyam shani chalisa jayati jayati shanidev dayala lyrics in hindi
Shani Chalisa Paath - फोटो : AI

Shani Chalisa Paath Ke Niyam: शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ की गई उनकी पूजा व्यक्ति के जीवन से कष्टों को दूर कर सकती है। शास्त्रों में शनिदेव को कर्मों के अनुसार फल देने वाला देवता कहा गया है, इसलिए उनकी कृपा पाने के लिए सच्चे मन से उपासना करना बेहद जरूरी होता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के कई उपाय बताए गए हैं, जिनमें सबसे सरल और प्रभावी उपाय शनि चालीसा का पाठ माना जाता है। विश्वास किया जाता है कि नियमित और श्रद्धापूर्वक किया गया यह पाठ शनि दोषों के प्रभाव को भी कम कर सकता है।



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शनि चालीसा पाठ के नियम - फोटो : अमर उजाला AI

शनि चालीसा पाठ के नियम

  • पाठ करते समय साधक का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। 
  • इस चालीसा का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन शनिवार को इसका विशेष महत्व बताया गया है। 
  • ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त के बाद का समय पाठ के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
  • पाठ के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखना जरूरी है। 
  • इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा और प्याज-लहसुन से बनी चीजों से परहेज करना चाहिए।
  • नकारात्मक विचारों से दूर रहकर और किसी प्रकार के विवाद से बचते हुए पूजा करनी चाहिए।

 

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शनि चालीसा पाठ की विधि - फोटो : adobe

शनि चालीसा पाठ की विधि

  • शनिवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ होकर काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें। 
  • इसके बाद शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 
  • यदि संभव हो, तो पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर चालीसा का पाठ करना और भी शुभ माना जाता है।
  • पाठ पूर्ण होने के बाद "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें। 
  • अंत में, दिनभर या जीवन में अनजाने में हुई गलतियों के लिए शनिदेव से क्षमा याचना करें। 
  • मान्यता है कि सच्ची भक्ति और विनम्रता के साथ की गई यह साधना व्यक्ति की कठिनाइयों को कम करती है।


 

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शनि चालीसा - फोटो : Amar Ujala

शनि चालीसा 

|| दोहा ||

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

|| चौपाई ||
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

|| दोहा ||
पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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