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Ravi Pradosh Vrat: रवि प्रदोष व्रत आज, पूजा के समय पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा आरोग्य और सुख

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 12 Jun 2022 10:57 AM IST
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Ravi Pradosh Vrat Know the Date Time Shubh Yog Significance and Vrat katha
आज 12 जून रविवार को ज्येष्ठ माह का दूसरा प्रदोष व्रत है। - फोटो : amar ujala

Ravi Pradosh Vrat: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो बार त्रयोदशी तिथि पड़ती है। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। प्रत्येक माह की दोनों त्रयोदशी तिथि भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त विधि-विधान से व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने शिवीजी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों का जीवन सुख-शांति और समृद्धि से भर देते हैं। जो भी जातक नियम और निष्ठा से प्रदोष व्रत रखता है उसके सभी कष्टों का नाश होता है। त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान भोलेशंकर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में की गई भगवान शिव की पूजा कई गुना ज्यादा फलदायी होती है। आज 12 जून रविवार को ज्येष्ठ माह का दूसरा प्रदोष व्रत है। रवि प्रदोष व्रत करने से उत्तम स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है। 12 जून को प्रातः 03:23 से ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि आरंभ हो चुकी है, जो 13 जून दिन सोमवार को 12:26 एएम पर समाप्त होगा। ऐसे में रवि प्रदोष व्रत 12 जून को रखा जाएगा। जो साधक रवि प्रदोष व्रत रहेंगे, उनको रवि प्रदोष व्रत कथा को पढ़ना या सुनना चाहिए। आइए जानते हैं इस व्रत कथा के बारे में। 

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रवि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त  - फोटो : Social media

रवि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 
रवि प्रदोष  पूजा का शुभ मुहूर्त  सायं 07:19 से रात्रि 09:20 बजे तक है। 
रवि योग रात्रि 11:58 से 13 जून प्रातः 05:23 तक है

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रवि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त  - फोटो : Social media

रवि प्रदोष व्रत का महत्व 
रवि प्रदोष व्रत रखने से धन, आयु, बल, पुत्र आदि की प्राप्ति होती है। दिन के आधार पर प्रदोष व्रत का महत्व अलग-अलग होता है। रविवार के दिन का प्रदोष व्रत, जो रवि प्रदोष व्रत होता है, इसके करने से लंबी आयु प्राप्त होती है और रोग आदि से मुक्ति भी मिलती है। 

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रवि प्रदोष व्रत कथा - फोटो : Social media

रवि प्रदोष व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। ब्राह्मण की पत्नी प्रदोष के व्रत का नियम पूर्वक व्रत करती थी। एक दिन इनका बेटा गंगा स्नान करने के लिए अपने गांव से बाहर जा रहा था तो उसे कुछ चोरों ने पकड़ लिया और कहा कि हम तुम्हें तभी छोड़ेंगे जब तुम अपने पिता के गुप्त धन के बारे में हमें सब कुछ बताओगे। बेटे ने समझाया कि हम गरीब हैं और हमारे पास कोई गुप्त धन नहीं है। ऐसा सुनकर चोर उसे छोड़कर भाग गए। बेटा बहुत थक गया था। तभी वह राजा के कुछ सिपाही चोरों की तलाश में आए। उन्होंने बरगद के पेड़ के नीचे बेटे को देखा तो उन्हें लगा कि ये चारों में से एक है। सिपाहियों ने ब्राह्मण के बेटे को पकड़ कर जेल में डाल दिया। दूसरी तरफ ब्राह्मण की पत्नी अपने बेटे का इंतजार कर रही थी। जब दिन ढलने के बाद भी बेटा घर नहीं आया तो मां परेशान हो गई। उस दिन प्रदोष व्रत का दिन था। तब उन्होंने भगवान शिव से बेटी की सुरक्षा की प्रार्थना की। भगवान शिव ने माता की प्रार्थना को स्वीकार कर राजा को सपने में दर्शन दिए और कहा कि तूने जिस लड़के को पकड़ा है वह एक ब्राह्मण पुत्र है।  उसे छोड़ दे वो बेकसूर है। अगर तूने नहीं छोड़ा तो तेरा सारा राजपाट नष्ट हो जाएगा। अगले दिन राजा ने बेटे को छोड़ दिया और निर्दोष बेटे से क्षमा मांगी। 

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रवि प्रदोष व्रत पर इस विधि से करें पूजा - फोटो : istock

रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • रवि प्रदोष व्रत के दिन पूजा के दौरान सबसे पहले शिवलिंग पर दूध, घी और दही से अभिषेक करें। 
  • इसके बाद जलाभिषेक करें और फिर जल से भरे तांबे के लोटे में चीनी डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। 
  • फिर शिवलिंग पर पुष्प, माला, बिल्वपत्र और धतूरा आदि अर्पित करें। 
  • इसके बाद भोलेनाथ को भोग लगाएं।
  • भोग के पश्चात धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा और व्रत कथा का पाठ करें। 
  • फिर भोलेनाथ के प्रिय मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करें। 
  • इसके बाद प्रदोष काल में शिवजी को पंचामृत से स्नान कराकर साबुत चावल की खीर और फलों का भोग लगाएं। 
  • फिर शिव मंत्र और पंचाक्षरी स्तोत्र का 5 बार पाठ करें। 
  • पूजा के अंत में भोलेनाथ की आरती करें।
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