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शारदीय नवरात्रि 2026: इस बार 10 दिन होगी मां दुर्गा की आराधना, यहां देखें पूरा कैलेंडर

Manoj Kumar Dwivedi मनोज कुमार द्विवेदी
Updated Thu, 08 Oct 2026 06:18 PM IST
सार

इस बार नवरात्रि का पर्व 10 दिनों तक चलेगा, हालांकि देवी के नौ स्वरूपों की पूजा ही की जाएगी। यानी नवरात्रि का धार्मिक आधार नौ देवियों की आराधना पर ही रहेगा। ऐसे में आइए जानते हैं मां के नौ स्वरूपों की पूजा तिथियां...

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Shardiya Navratri 2026 10 days ghatasthapana muhurat puja dates
शारदीय नवरात्रि 2026 - फोटो : AI

इस बार तिथियों में वृद्धि के कारण नवरात्रि का पर्व 10 दिनों तक चलेगा। पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि दो दिन रहने के कारण नवरात्रि की अवधि एक दिन बढ़ गई है। सप्तमी तिथि 17 अक्तूबर को प्रातः काल 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 18 अक्तूबर को प्रातः काल 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। नियमानुसार जो तिथि दोनों दिन सूर्योदय के समय व्याप्त हो तो तिथि वृद्धि होती है। 11 अक्तूबर से शुरू होकर यह पर्व 20 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक नवमी तिथि के बाद विजयादशमी और दशहरा के साथ संपन्न होगा, हालांकि देवी के नौ स्वरूपों की पूजा ही की जाएगी। यानी नवरात्रि का धार्मिक आधार नौ देवियों की आराधना पर ही रहेगा।



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Shardiya Navratri 2026 10 days ghatasthapana muhurat puja dates
11 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू - फोटो : adobe

नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष नवरात्र के प्रथम दिन पूरे समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की उपस्थिति रहेगी। धार्मिक ग्रंथों में इन योगों के दौरान कलश स्थापना करना वर्जित माना गया है। ऐसी स्थिति में कुछ विशेष मुहूर्त में घट स्थापना करना शास्त्रसम्मत और सर्वोत्तम माना जाता है।

प्रतिपदा तिथि आरंभ: 10 अक्तूबर , शनिवार रात्रि 09:19 बजे से
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 11 अक्तूबर , रविवार रात्रि 09:30 बजे तक

Shardiya Navratri 2026 10 days ghatasthapana muhurat puja dates
कलश स्थापना में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग - फोटो : adobe stock

कलश स्थापना में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग
शास्त्रों में प्रातःकाल में देवी आह्वान और घटस्थापना का विधान है। 11 अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र रात्रि 10:32 बजे तक और वैधृति योग रात्रि 09:05 बजे तक रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार चित्रा नक्षत्र के शुरुआती दो चरणों को छोड़कर अथवा अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना श्रेष्ठ मानी गई है।

कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त
चौघड़िया मुहूर्त: प्रातः 10 बजकर 4 मिनट से दोपहर 11 बजकर 55 मिनट तक बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक

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हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन - फोटो : Adobe

हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन
मां दुर्गा का आगमन इस बार हाथी पर होगा। देवी भागवत पुराण के अनुसार हाथी पर देवी का आगमन शुभ माना जाता है। हाथी को शक्ति, स्थिरता, धैर्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है, इसलिए माता का हाथी पर आगमन देश में अच्छी वर्षा, कृषि समृद्धि और सुख-शांति का संकेत देता है।
 

तिथि दिन  माता का स्वरूप
11 अक्तूबर प्रतिपदा मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना
12 अक्तूबर द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
13 अक्तूबर तृतीया मां चंद्रघंटा की पूजा
14 अक्तूबर चतुर्थी मां कूष्मांडा की पूजा
15 अक्तूबर पंचमी मां स्कंदमाता की पूजा
16 अक्तूबर षष्ठी मां कात्यायनी की पूजा
17 अक्तूबर सप्तमी मां कालरात्रि की पूजा
18 अक्तूबर दुर्गा दुर्गा अष्टमी मां महागौरी की पूजा
19 अक्तूबर अष्टमी अष्टमी और नवमी, कन्या पूजन
20 अक्तूबर नवमी नवमी तिथि के बाद विजयादशमी

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Shardiya Navratri 2026 10 days ghatasthapana muhurat puja dates
11 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू - फोटो : adobe

शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। जिनमें प्रथम दिन शैलपुत्री: पर्वतराज हिमालय की पुत्री। वृषभ पर सवार। स्थिरता और मन की दृढ़ता प्रदान करती हैं। द्वितीय ब्रह्मचारिणी: कठोर तपस्या का प्रतीक। ज्ञान, वैराग्य और संयम की अधिष्ठात्री हैं। तृतीय चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र से सुशोभित। इनकी आराधना से भय का नाश और शत्रु बाधा दूर होती है। चतुर्थ कूष्मांडा: अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली। आयु, यश और आरोग्य देने वाली हैं।पंचम स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय की माता। संतान सुख और वात्सल्य की प्रदायिनी हैं। षष्ठम कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में अवतरित। दांपत्य जीवन में सुख और शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं। सप्तम देवी दुर्गा कालरात्रि अंधकार का नाश करने वाली हैं। भक्तों को अभय प्रदान कर ग्रह बाधा को दूर करती हैं।अष्टम महागौरी: गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र धारिणी। पापों का क्षय कर शुद्धता और समृद्धि देती हैं। नवम सिद्धिदात्री: सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इनकी कृपा से साधक को मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

 ज्योतिषाचार्य  पं.मनोज कुमार द्विवेदी
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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