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Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर कब करें स्नान-दान? जानें सही तिथि और पूजा विधि

Thu, 02 Jul 2026 10:28 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 02 Jul 2026 10:28 AM IST
सार

Ashadha Amavasya 2026: जानें आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है, शुभ मुहूर्त, स्नान-दान का महत्व, पूजा विधि, पितृ तर्पण का सही समय और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय।

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Ashadha Amavasya 2026 Date Shubh Muhurat Snan-Daan and Puja Vidhi
aashadh amavasya - फोटो : amar ujala

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है, जिसे पितरों की शांति, स्नान-दान, तर्पण और देवी-देवताओं की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ मास की अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन पितृ तर्पण के साथ मां लक्ष्मी और शनिदेव की पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में आषाढ़ अमावस्या कब है, इसका शुभ समय, धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय।

Ashadha Amavasya 2026 Date Shubh Muhurat Snan-Daan and Puja Vidhi
आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है

आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6:49 बजे प्रारंभ होगी और 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3:12 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। इसी दिन स्नान, दान, तर्पण, श्राद्ध और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाएगा।

Ashadha Amavasya 2026 Date Shubh Muhurat Snan-Daan and Puja Vidhi
आषाढ़ अमावस्या को सनातन परंपरा में अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। - फोटो : 1

आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व
आषाढ़ अमावस्या को सनातन परंपरा में अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। कई क्षेत्रों में इसे हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किसान खेती के उपकरणों और हल की पूजा कर अच्छी फसल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर पितरों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही मां लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक सुख-समृद्धि और शनिदेव की आराधना करने से जीवन की बाधाओं एवं कष्टों में कमी आने की मान्यता है।

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आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि - फोटो : amar ujala

आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि

  • आषाढ़ अमावस्या के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। 
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और पितरों का स्मरण करते हुए पूजा का संकल्प लें।
  • यदि संभव हो तो पवित्र नदी या तीर्थस्थल में स्नान करें।
  • घर में गंगाजल मिले जल से स्नान भी शुभ माना जाता है।
  • पूजा के दौरान दीपक जलाकर भगवान का पूजन करें, पितरों के निमित्त तर्पण करें। 
  • अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करें।
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Ashadha Amavasya 2026 Date Shubh Muhurat Snan-Daan and Puja Vidhi
पितरों की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करें। - फोटो : adobe stock

आषाढ़ अमावस्या पर क्या करें?

  • पितरों की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करें।
  • जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, तिल, छाता, जल और दक्षिणा का दान करें।
  • पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करें।
  • शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए काले तिल, उड़द या सरसों के तेल का दान करें।
  • कुत्ते, गाय, कौवे और अन्य जीवों को भोजन कराएं।
  • मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें और श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जप करें।
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