Basant Panchami 2026 Upay: वसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस त्योहार को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। साथ ही, यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी देता है। विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में इसे बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से मां सरस्वती की कृपा मिलती है और शिक्षा करियर और कला में उन्नति प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं इस पावन दिन पर किए जाने वाले कुछ प्रभावशाली उपाय।
Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर करें ये खास उपाय, मिलेगी बुद्धि और मां सरस्वती का आशीर्वाद
Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। मान्यता है कि इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से मां सरस्वती की कृपा मिलती है और शिक्षा करियर और कला में उन्नति प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं इस पावन दिन पर किए जाने वाले कुछ प्रभावशाली उपाय।
वसंत पंचमी के विशेष उपाय
करियर और उन्नति के लिए
वसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां सरस्वती के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और “ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी, वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।” मंत्र का का 21, 51 या 108 बार जाप करें। ऐसा करने से कार्यक्षेत्र में प्रगति के योग बनते हैं और सफलता प्राप्त होती है।
वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए
जिन दंपतियों के रिश्ते में तनाव या मतभेद चल रहे हैं, उन्हें वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को नारियल, पीली चुनरी और कलावा अर्पित करना चाहिए। इस उपाय से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और संबंधों में फिर से मिठास आती है।
मां सरस्वती की विशेष कृपा के लिए
इस शुभ दिन मां सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा करें। उन्हें हल्दी का तिलक लगाएं और पीले रंग के फूल, फल, वस्त्र एवं मिठाई अर्पित करें। साथ ही देवी के वैदिक मंत्रों का श्रद्धा से जाप करें। ऐसा करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और साधक को विद्या व बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां सरस्वती के वैदिक मंत्र
ॐ सरस्वती नमो नमः।
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्।
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