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Ganga Dussehra 2026: कब है गंगा दशहरा? जानें शुभ मुहूर्त और मां गंगा के अवतरण की कथा

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Sun, 03 May 2026 07:46 AM IST
सार

गंगा दशहरा 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त जानें। इस दिन मां गंगा के अवतरण से जुड़ी मान्यता और गंगा स्नान-दान का

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Ganga Dussehra 2026 Date Puja Timings and the Sacred Story of River Ganga
गंगा दशहरा - फोटो : Amar Ujala

Ganga Dussehra: सनातन धर्म में मां गंगा को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायिनी माना गया है। गंगाजल का धार्मिक कार्यों में विशेष महत्व होता है और किसी भी पूजा-पाठ में शुद्धिकरण के लिए इसका उपयोग अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है, इसलिए उन्हें पतितपावनी भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था, जिसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं कि 2026 में गंगा दशहरा कब मनाया जाएगा, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और मां गंगा के अवतरण की पौराणिक कथा क्या है।


 

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Ganga Dussehra 2026 Date Puja Timings and the Sacred Story of River Ganga
गंगा दशहरा - फोटो : adobe

गंगा दशहरा 2026 शुभ मुहूर्त
गंगा दशहरा 2026 में दशमी तिथि 25 मई 2026 को सुबह 4:30 बजे शुरू होगी और 26 मई 2026 को सुबह 5:10 बजे समाप्त होगी। इस दौरान हस्त नक्षत्र का प्रभाव 26 मई 2026 सुबह 4:08 बजे से शुरू होकर 27 मई 2026 सुबह 5:56 बजे तक रहेगा। वहीं व्यतीपात योग 27 मई 2026 सुबह 3:11 बजे से शुरू होकर 28 मई 2026 सुबह 3:25 बजे तक रहेगा।

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Ganga Dussehra 2026 Date Puja Timings and the Sacred Story of River Ganga
गंगा दशहरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पूजा के लिए विशेष शुभ समय
इस दिन पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है, जो सुबह 4:40 बजे से 5:23 बजे तक रहेगा। इसके बाद सूर्योदय सुबह 6:06 बजे होगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से 1:10 बजे तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

Ganga Dussehra 2026 Date Puja Timings and the Sacred Story of River Ganga
गंगा दशहरा - फोटो : amar ujala

राजा सगर के पुत्रों का अंत 
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा सगर के साठ हजार पुत्रों ने महर्षि कपिल मुनि का अपमान कर दिया था। इससे क्रोधित होकर मुनि ने उन्हें अपनी तपस्या की अग्नि से भस्म कर दिया। इस कारण सभी पुत्र असामयिक मृत्यु को प्राप्त हुए और बिना अंतिम संस्कार के उनकी आत्माएं मोक्ष के बिना भटकने लगीं।

भगीरथ का संकल्प
राजा सगर के वंश में बाद में भगीरथ का जन्म हुआ। जब उन्हें अपने पूर्वजों की दुर्दशा का पता चला, तो उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वर्ग से मां गंगा को पृथ्वी पर लाकर अपने पूर्वजों का उद्धार करेंगे। उन्होंने कठोर तपस्या की और भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया।

मां गंगा का धरती पर आगमन
भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने का वरदान दिया। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं। जब उनकी पवित्र धारा राजा सगर के पुत्रों की अस्थियों से टकराई, तो सभी आत्माओं को मोक्ष प्राप्त हुआ। इसी दिव्य घटना की स्मृति में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है और माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान से सभी पापों का नाश होता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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