Shani Amavasya: जब अमावस्या शनिवार के दिन आती है, तो उसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। 2026 में साल की पहली शनि अमावस्या ज्येष्ठ माह में पड़ने जा रही है, जो खास मानी जाती है। इस दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनमें एक दुर्लभ योग भी शामिल है। मान्यता है कि इस अवसर पर व्रत, स्नान, दान और शनिदेव की पूजा करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं। खासतौर पर जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव है, उनके लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं शनि अमावस्या 2026 की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन बनने वाले विशेष संयोगों के बारे में।
Shani Amavasya 2026: साल की पहली शनि अमावस्या पर बन रहे है 5 शुभ संयोग, जानें पूजा का मुहूर्त और महत्व
शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या कहा जाता है। इस बार 5 शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनमें एक दुर्लभ योग भी शामिल है। जानें शनि अमावस्या 2026 की तारीख, पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
5 शुभ संयोगों से खास बनेगी शनि अमावस्या
साल की पहली शनि अमावस्या इस बार कई शुभ योगों के कारण और भी विशेष मानी जा रही है। इस दिन एक साथ 5 महत्वपूर्ण संयोग बन रहे हैं, जो इसे अत्यंत पुण्यदायी बनाते हैं। सबसे खास बात यह है कि इसी दिन शनि जयंती यानी शनिदेव का जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा।
इसके साथ ही यह ज्येष्ठ माह की अमावस्या है, जिसे दर्श अमावस्या के रूप में भी जाना जाता है।
इसी दिन वट सावित्री व्रत का संयोग भी बन रहा है, जो विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन खास है, क्योंकि सुबह से लेकर 10 बजकर 26 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा, जो जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है।
इसके बाद 10 बजकर 26 मिनट से शोभन योग शुरू होगा, जो पूरी रात तक रहेगा और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय प्रदान करेगा।
शनि अमावस्या 2026 मुहूर्त
शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय सुबह 5:30 बजे होगा।
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:07 बजे से 4:48 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक
शनिदेव की पूजा के लिए विशेष शुभ समय: सुबह 7:19 बजे से 8:59 बजे तक
शनि अमावस्या का महत्व
शनि अमावस्या का दिन पूजा, व्रत, स्नान और दान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कार्य भी किए जाते हैं, जिससे पितृ दोष से राहत मिलने की मान्यता है। इस बार शनि अमावस्या के साथ शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इसे और अधिक खास बनाता है। ऐसे में इस दिन किए गए धार्मिक कार्य और उपाय शनि के अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि इस अवसर पर प्रसन्न होकर शनिदेव अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति का आशीर्वाद देते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
