Nazar Dosh Upay In Hindi: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक ग्रंथों में कालभैरव को काशी का रक्षक और संकटों का नाश करने वाला देवता बताया गया है, जो अपने भक्तों की हर तरह की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं।
Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर करें ये पांच उपाय, नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा से मिलेगा छुटकारा
Kalashtami 2026 Upya: कालाष्टमी को बेहद प्रभावशाली दिन माना जाता है, खासकर जब बात बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा पाने की हो। आइए जानते हैं इस दिन किए जानें वाले कुछ खास उपाय।
नजर दोष दूर करने के उपाय
काला धागा उपाय
कालाष्टमी के दिन कालभैरव मंदिर में जाकर उनके चरणों से सिंदूर लें और उसे काले धागे पर लगाएं। इसके बाद “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” मंत्र का जाप करते हुए इस धागे को दाहिने हाथ की कलाई या गले में धारण करें। मान्यता है कि यह उपाय व्यक्ति को बुरी नजर से बचाता है और एक सुरक्षात्मक कवच की तरह काम करता है।
सरसों के तेल का दीपक
इस दिन घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चार मुख वाला दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दीपक की लौ से काजल बनाकर घर के बच्चों और अन्य सदस्यों के कान के पीछे लगाएं। ऐसा करने से नजर दोष का प्रभाव कम होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
मंत्र जाप का महत्व
कालाष्टमी के दिन “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। पूजा के दौरान अपने सामने दीपक जलाकर भैरव बाबा से सुरक्षा और सुख-शांति की कामना करें।
इस दिन क्या करें
- काले कुत्ते को गुड़ लगी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।
- तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें।
- अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें।
- जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य फल प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी की रात बेहद शक्तिशाली मानी जाती है। इस समय भगवान कालभैरव की ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है। मान्यता है कि इस रात की गई साधना का फल लंबे समय तक मिलता है और व्यक्ति अपने डर पर विजय प्राप्त कर सकता है।
अमावस्या के निकट होने के कारण इस दौरान रात का अंधकार अधिक गहरा होता है। तांत्रिक परंपराओं में इस अंधकार को ऊर्जा का केंद्र माना गया है, जहां से नई शक्ति उत्पन्न होती है। इसी समय सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की सूक्ष्म शक्तियां सक्रिय रहती हैं, जिन्हें साधक मंत्रों और साधना के माध्यम से नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।