Sita Navami 2026 Shubh Muhurat: सनातन धर्म में माता सीता के अवतरण दिवस को 'सीता नवमी' या 'जानकी जयंती' के रूप में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पावन दिवस एक विशेष पर्व है, जो साहस, त्याग और पवित्रता के महत्व को दर्शाता है। वर्ष 2026 में इस पर्व की सही तिथि को लेकर भक्तों के बीच कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां कुछ लोगों का मानना है कि इसे 24 अप्रैल को मनाया जाना चाहिए, वहीं अन्य लोगों की राय है कि 25 अप्रैल ही इसके लिए सही दिन है। पारंपरिक नियम के अनुसार, व्रत उसी दिन रखा जाता है, जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि विद्यमान होती है। इसलिए, सही तिथि की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। आइए पंचांग के नियमों और तिथि की गणना के आधार पर विस्तार से जानते हैं कि 'सीता नवमी' का व्रत किस दिन रखा जाना चाहिए।
Sita Navami 2026: 24 या 25 अप्रैल कब है सीता नवमी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
सनातन धर्म में माता सीता के प्राकट्य दिवस को सीता नवमी या जानकी जयंती के रूप में श्रद्धा से मनाया जाता है। इसकी तिथि को लेकर भ्रम है, क्योंकि कुछ लोग 24 अप्रैल तो कुछ 25 अप्रैल मान रहे हैं।
सीता नवमी तिथि
वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि आरंभ: 24 अप्रैल, सायं 07:21 बजे से
वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि समाप्त: 25 अप्रैल, सायं 06:27 बजे
उदयातिथि के अनुसार 25 अप्रैल, 2026 को सीता नवमी व्रत रखना शुभ माना जाता है।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
पूजा करने का सबसे उत्तम समय: 25 अप्रैल, प्रातः 10:58 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक
इस अवधि के दौरान, भक्त लगभग 2 घंटे 36 मिनट तक पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस समय की गई पूजा से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
सीता नवमी पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
- व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता सीता और भगवान राम की तस्वीर स्थापित करें।
- पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़ककर वातावरण को शुद्ध करें।
- माता सीता का श्रृंगार करें और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
- फूल, माला, चावल, रोली, धूप, दीप, फल और मिठाई चढ़ाएं।
- तिल के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करें।
- सीता मंत्रों का 108 बार जाप करें और सीता चालीसा का पाठ करें।
- शाम के समय फिर से आरती करें।
- पूरी श्रद्धा से पूजा करने पर शुभ फल और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।