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कार्तिक मास कब शुरू होगा? जानें कार्तिगाई दीपम से जुड़ी खास मान्यता

Mon, 05 Oct 2026 01:31 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 05 Oct 2026 01:31 PM IST
सार

Kartik Month 2026: हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद पवित्र माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। दक्षिण भारत में कार्तिगाई दीपम का पर्व भी इसी अवधि से जुड़ा है। जानें 2026 में कार्तिक मास कब शुरू होगा और कार्तिगाई दीपम से जुड़ी खास धार्मिक मान्यता क्या है।

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Kartik Month 2026 Know the Date Religious Significance and Karthigai Deepam Belief
kartik maas - फोटो : amar ujala

Karthigai Deepam 2026: दक्षिण भारत में कार्तिगाई दीपम का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। खासतौर पर तमिलनाडु में इस दिन घरों को दीपों से सजाने और भगवान शिव तथा भगवान मुरुगन की पूजा करने की परंपरा है। यह पर्व प्रकाश, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में कार्तिगाई दीपम का मुख्य पर्व 24 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन दीप जलाने और दीपदान करने से नकारात्मकता दूर होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं कार्तिगाई दीपम 2026 की तारीख, धार्मिक महत्व और इस दिन निभाई जाने वाली प्रमुख परंपराओं के बारे में।

Kartik Month 2026 Know the Date Religious Significance and Karthigai Deepam Belief
कार्तिगाई दीपम 2026 कब है? - फोटो : freepik

कार्तिगाई दीपम 2026 कब है?
उत्तर भारत में प्रचलित पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार से होगी और इसका समापन 24 नवंबर 2026, मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के साथ होगा। इसी दिन दक्षिण भारत की प्रमुख परंपरा कार्तिगाई दीपम भी मनाई जाएगी। कार्तिगाई दीपम को विशेष रूप से तमिलनाडु में प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं।

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क्यों मनाया जाता है कार्तिगाई दीपम? - फोटो : freepik

क्यों मनाया जाता है कार्तिगाई दीपम?
कार्तिगाई दीपम का संबंध भगवान शिव और भगवान मुरुगन से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं से माना जाता है। हिंदू परंपरा में दीपक को अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने अनंत ज्योति के स्वरूप में स्वयं को प्रकट किया था। इसी दिव्य प्रकाश की स्मृति से कार्तिगाई दीपम की परंपरा को जोड़ा जाता है। दक्षिण भारत में भगवान मुरुगन की आराधना का भी इस पर्व में विशेष महत्व है।

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घर में जलाए जाते हैं मिट्टी के दीप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

घर में जलाए जाते हैं मिट्टी के दीप
इस दिन घर की साफ-सफाई करके उसे सुंदर तरीके से सजाया जाता है। महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य घर के बाहर कोलम यानी रंगोली बनाते हैं। इसके बाद मिट्टी के छोटे-छोटे दीपक जलाकर घर के अलग-अलग हिस्सों में रखे जाते हैं। शाम के समय दीपों से सजा घर बेहद सुंदर दिखाई देता है। दीप जलाने की यह परंपरा केवल सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आध्यात्मिक रूप से शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है।

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तिरुवन्नामलाई में जलता है महादीपम - फोटो : अमर उजाला

तिरुवन्नामलाई में जलता है महादीपम
कार्तिगाई दीपम का सबसे प्रसिद्ध आयोजन तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में होता है। यहां स्थित अरुणाचल पहाड़ी पर विशेष अवसर पर विशाल महादीपम प्रज्वलित किया जाता है। इस दिव्य दीप को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु तिरुवन्नामलाई पहुंचते हैं। अरुणाचलेश्वर मंदिर में भी इस अवसर पर विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पहाड़ी के शिखर पर प्रज्वलित होने वाला महादीपम इस पर्व का प्रमुख आकर्षण माना जाता है।

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