Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ व्रत रखती हैं। पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में सरगी, पूजा सामग्री, व्रत कथा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि को लेकर कई सवाल होते हैं। ऐसे में व्रत शुरू करने से लेकर चंद्र दर्शन के बाद उपवास खोलने तक की सही परंपरा जानना जरूरी है। आइए जानते हैं करवा चौथ 2026 की पूजा विधि, जरूरी सामग्री और व्रत से जुड़े नियम।
पहली बार रख रही हैं करवा चौथ का व्रत? जानें पूजा विधि, सामग्री, सरगी और चंद्रोदय का समय
करवा चौथ का व्रत पहली बार रखने जा रही हैं? जानें सरगी से लेकर चंद्र दर्शन तक की पूरी पूजा विधि, जरूरी सामग्री, व्रत के नियम और चांद निकलने के बाद व्रत खोलने का सही तरीका।
करवा चौथ 2026 कब है?
करवा चौथ का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं परंपरागत रूप से निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा करती हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन करने और अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा किया जाता है। इस वर्ष करवा चौथ की तारीख और पूजा का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए। चंद्रोदय का समय भी शहर के हिसाब से अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।
पहली बार करवा चौथ का व्रत कैसे शुरू करें?
- करवा चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और परिवार की परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करें।
- सरगी में फल, दूध, मेवे, मिठाई और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
- सरगी खाने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
- परंपरागत रूप से सरगी सास की ओर से बहू को दी जाती है। हालांकि, परिवारों में इसकी रीति अलग-अलग हो सकती है।
- सरगी के बाद महिलाएं व्रत रखती हैं। पारंपरिक निर्जला व्रत में भोजन और पानी ग्रहण नहीं किया जाता।
- दिनभर मन को शांत रखते हुए पूजा की तैयारियां करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान का स्मरण करें।
- ध्यान रखें कि निर्जला व्रत सभी के लिए सुरक्षित नहीं होता।
- गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाएं व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- जरूरत पड़ने पर अपनी सेहत के अनुसार व्रत की परंपरा में बदलाव करना उचित है।
- शाम के समय घर के पूजा स्थल की सफाई करें और एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- वहां माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- करवा चौथ की पूजा में करवा माता का स्मरण भी किया जाता है।
- इसके बाद दीपक जलाएं और रोली, अक्षत, पुष्प तथा अन्य पूजा सामग्री तैयार रखें।
करवा चौथ पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
- मिट्टी या तांबे का करवा और उसका ढक्कन
- छलनी और जल से भरा लोटा
- पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- दीपक, घी या तेल, रुई और माचिस
- धूपबत्ती और अगरबत्ती
- रोली, चंदन, अक्षत और सिंदूर
- फूल, फल और मिठाई
- माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री, जैसे चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और सिंदूर
- करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तक
- करवा चौथ का पारंपरिक प्रसाद, जैसे मठरी या अन्य मिठाई
- चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल
करवा चौथ की पूजा विधि क्या है?
- शाम को पूजा के समय माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश का स्मरण करें। देवी पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख तथा सौभाग्य की कामना करें।
- करवे में जल भरकर उसे पूजा स्थल पर रखें। रोली और अक्षत से तिलक करें तथा पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान करवा चौथ की पारंपरिक विधियों का पालन करें।
- पूजा के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा पढ़ें या परिवार की अन्य महिलाओं के साथ सुनें। कई जगह महिलाएं समूह में बैठकर कथा सुनती हैं और पूजा के पारंपरिक गीत गाती हैं।
- व्रत कथा के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की आरती करें। इसके बाद परिवार की सुख-शांति और पति की लंबी उम्र की कामना करें।
- करवा चौथ की पूजा में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। चंद्रमा निकलने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद चंद्रदेव को जल अर्पित करके अर्घ्य दिया जाता है।
- महिलाएं अपने पति की आरती उतारती हैं और उनके हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलती हैं। इसके बाद मिठाई या भोजन ग्रहण किया जाता है।
- चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने स्थानीय चंद्रोदय समय की पुष्टि कर लें।