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Phalguna Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों को इन उपायों से करें प्रसन्न, 7 पीढ़ियों का होगा उद्धार
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Fri, 06 Feb 2026 12:31 AM IST
सार
Phalguna Amavasya Upay: फाल्गुन मास की अमावस्या पितरों के लिए विशेष दिन माना जाता है। इस दिन तर्पण, दान और पूजा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। फाल्गुन अमावस्या 2026 में पितरों को प्रसन्न करने के उपाय अपनाने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ भी मिलता है।
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फाल्गुन अमावस्या 2026
- फोटो : amar ujala
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Phalguna Amavasya Upay: फाल्गुन मास हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है, और इस महीने में पड़ने वाली अमावस्या विशेष रूप से पितरों की कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर होती है। माना जाता है कि इस दिन किए गए पितृ पूजन, तर्पण और दान से न सिर्फ परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है, बल्कि कुंडली में मौजूद पितृ दोष भी दूर होता है। यह दिन परिवार और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का अद्भुत अवसर प्रदान करता है।
फाल्गुन अमावस्या 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- फोटो : अमर उजाला
फाल्गुन अमावस्या 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट से शुरू होगी और यह तिथि 17 फरवरी 2026 को सुबह 5 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। इस साल व्रत, स्नान-दान और तर्पण 17 फरवरी को किया जाएगा। शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 37 मिनट से 1 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस समय में किए गए तर्पण और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, जिससे पितृ देवों की कृपा प्राप्त होती है।
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। इस दिन पिंडदान और तर्पण करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं।
तर्पण और पिंडदान
फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों की प्रसन्नता के लिए तर्पण और पिंडदान सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं। गंगा या किसी पवित्र नदी के किनारे जल में काले तिल, कुशा और जौ मिलाकर पितरों के लिए तर्पण करना श्रेष्ठ माना जाता है। तर्पण करते समय अपने पूर्वजों का स्मरण करें और उनका आवाहन करें। इस दिन पिंडदान और तर्पण करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं, और परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और ऐश्वर्य बढ़ता है।
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फाल्गुन अमावस्या पर पीपल की जड़ में जल अर्पित करें।
- फोटो : freepik
पीपल वृक्ष की पूजा
पीपल वृक्ष में त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ पितरों का वास माना जाता है। फाल्गुन अमावस्या पर पीपल की जड़ में जल अर्पित करें और शाम को सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं और परिवार पर सात पीढ़ियों तक आशीर्वाद रहता है। इस उपाय से परिवार में सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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गाय, कौए और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालना चाहिए।
- फोटो : Adobe Stock
गौ सेवा और जीवों को भोजन देना
सनातन परंपरा में पंचबलि कर्म और गौ सेवा का विशेष महत्व है। अमावस्या के दिन भोजन ग्रहण करने से पहले गाय, कौए और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालना चाहिए। गाय को हरा चारा खिलाने से घर में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य बढ़ता है। इसी तरह अन्य जीव-जंतुओं को भोजन देने से पितृ प्रसन्न होकर परिवार पर आशीर्वाद देते हैं।
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