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Shani Jayanti 2026: घर में शनिदेव की पूजा वर्जित क्यों मानी जाती है? पढ़ें पौराणिक मान्यताएं और नियम

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Fri, 08 May 2026 12:57 AM IST
सार

Shani Jayanti 2026: हिंदू धर्म में शनिदेव की पूजा से जुड़े कई नियम और मान्यताएं हैं। जानें आखिर क्यों घर में शनिदेव की पूजा करना वर्जित माना जाता है और इसके पीछे कौन-सी पौराणिक कथा जुड़ी है।

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Shani Jayanti 2026 Why Is Shanidev Not Worshipped at Home Know the Religious Belief
shani jayanti - फोटो : amar ujala

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा केवल श्रद्धा से ही नहीं, बल्कि नियम और परंपराओं के अनुसार करने का भी विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि विधि-विधान से की गई पूजा शुभ फल प्रदान करती है, जबकि नियमों की अनदेखी करने पर उसका नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि हर देवी-देवता की आराधना से जुड़े कुछ खास नियम बताए गए हैं। शनिदेव की पूजा को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इन्हीं मान्यताओं में एक प्रमुख नियम यह भी है कि शनिदेव की पूजा घर के अंदर करने से बचना चाहिए। इसके पीछे पौराणिक कारण और धार्मिक विश्वास जुड़े हुए हैं। शनि जयंती के पावन अवसर पर यदि आप भी शनिदेव की आराधना करने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि आखिर घर में उनकी पूजा क्यों वर्जित मानी जाती है।

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Shani Dev - फोटो : अमर उजाला AI

शनि पूजा के नियम 

  • पौराणिक मान्यता के अनुसार शनिदेव को उनकी पत्नी ने यह श्राप दिया था कि जिस पर भी उनकी दृष्टि पड़ेगी, उसका प्रभाव कठिन हो सकता है।
  • शनिदेव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है, जिनकी दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है।
  • पूजा के समय भक्त देवताओं की प्रतिमा को देखकर आराधना करते हैं, जिससे शनिदेव की “वक्र दृष्टि” के संपर्क में आने का भाव माना जाता है।
  • ऐसी मान्यता है कि घर में उनकी मूर्ति रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है।
  • इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मकता पर असर पड़ने की आशंका बताई जाती है।
  • परिवार के सदस्यों के जीवन में बाधाएं या रुकावटें आने की मान्यता भी जुड़ी हुई है।
  • इसी कारण शनिदेव की पूजा घर के बजाय शनि मंदिर में करना अधिक शुभ माना जाता है।
  • शनिवार या शनि जयंती के दिन भक्त विशेष रूप से मंदिर जाकर पूजा और उपाय करते हैं।
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शनि जयंती 2026 - फोटो : अमर उजाला

शनि जयंती तिथि 
पंचांग के अनुसार शनि जयंती का पर्व ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई, शनिवार को सुबह 4 बजकर 12 मिनट पर होगी, जो अगले दिन 17 मई, रविवार को देर रात 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर शनि जयंती 2026 का पर्व 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। यह विशेष बात है कि इस वर्ष शनि जयंती शनिवार के दिन ही पड़ रही है, जो शनिदेव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस दिन विधि-विधान से शनिदेव की पूजा और कुछ सरल उपाय करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

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शनि जयंती 2026 - फोटो : adobe stock

शनि जयंती पूजा विधि

  • शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करके एक चौकी पर काले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर शनिदेव की प्रतिमा स्थापित करें।
  • इसके बाद शनिदेव को पंचगव्य या पंचामृत से स्नान कराएं।
  • प्रतिमा पर कुमकुम और काजल अर्पित करें।
  • सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव के सामने रखें और धूप-दीप से आराधना करें।
  • इस दिन फूल और तेल से बनी मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
  • शनिदेव के मंत्रों का जाप श्रद्धा के साथ करें।
  • शनि चालीसा का पाठ अवश्य करें।
  • अंत में विधि-विधान से आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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