{"_id":"6aaa2d9766e62d70db050e3a","slug":"apple-iphone-duo-price-comparison-india-us-turkey-philippines-and-other-low-income-countries-report-2026-09-16","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"आईफोन डुओ: इस देश में सबसे महंगा बिक रहा एपल का फोल्डेबल फोन, गरीब देशों में लोगों की जेब क्यों काट रही कंपनी?","category":{"title":"Tech Diary","title_hn":"टेक डायरी","slug":"tech-diary"}}
आईफोन डुओ: इस देश में सबसे महंगा बिक रहा एपल का फोल्डेबल फोन, गरीब देशों में लोगों की जेब क्यों काट रही कंपनी?
Wed, 16 Sep 2026 11:18 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:18 AM IST
सार
एपल के आईफोन डुओ की कीमत को लेकर एक नई रिसर्च सामने आई है। एपल का नया फोल्डेबल आईफोन 'डुओ' अमेरिका जैसे अमीर देशों की तुलना में भारत, तुर्की और फिलीपींस जैसे विकासशील देशों में 63 प्रतिशत तक अधिक महंगा बिक रहा है। आखिर इसकी वजह देशों में आयात शुल्क या कमजोर करेंसी है या यह एपल किसी सोची-समझी रणनीति के तहत महंगी कीमत पर फोन बेच रहा है? आइए समझते हैं...
विज्ञापन
कम आय वाले देशों में ज्यादा है 'डुओ' की कीमत।
- फोटो : एपल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एपल का नया फोल्डेबल स्मार्टफोन आईफोन डुओ बाजार में आते ही अपनी आसमान छूती कीमतों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि यह प्रीमियम स्मार्टफोन अमेरिका जैसे अमीर और विकसित देशों की तुलना में भारत, फिलीपींस और तुर्की जैसे विकासशील देशों में काफी महंगा बेचा जा रहा है। टेकआर्क द्वारा 14 देशों के बाजारों पर किए गए एक ताजा विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि कम आय वाले देशों के ग्राहकों को इस फोन के लिए औसतन 63 प्रतिशत अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
एपल का पहला फोल्डेबल फोन है 'डुओ'
- फोटो : एपल
कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर
टेकआर्क ने अपने शोध में भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, केन्या, बांग्लादेश, फिलीपींस, वियतनाम और तुर्की जैसे 8 कम और मध्यम आय वाले देशों की तुलना अमेरिका, यूएई, हांगकांग, कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे 6 अमीर देशों से की है। आंकड़ों के मुताबिक, कम आय वाले देशों में आईफोन डुओ की औसत कीमत 3,669 डॉलर है, जबकि ज्यादा आय वाले देशों में यह महज 2,248 डॉलर है। इसका सीधा मतलब है कि कम क्रय शक्ति होने के बावजूद विकासशील देशों के लोग इस डिवाइस के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।
यह भी पढ़ें: क्या आईफोन 18 प्रो की सेल से पहले सस्ता हो गया आईफोन 17 प्रो और 17 प्रो मैक्स? जानें क्या है ऑफर
तुर्किये और फिलीपींस में सबसे महंगा
इस तुलनात्मक अध्ययन में तुर्किये सबसे महंगे बाजार के रूप में उभरा है, जहां आईफोन डुओ की कीमत 4,741 डॉलर है। इसके बाद फिलीपींस का नंबर आता है, जहां यह 4,519 डॉलर में बिक रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किये में स्थानीय मुद्रा में भारी गिरावट और आयातित या लग्जरी इलेक्ट्रॉनिक्स पर लगने वाले भारी टैक्स के कारण कीमतें इतनी ज्यादा हैं। वहीं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश इस सूची में लगभग 2,950 डॉलर से लेकर 3,590 डॉलर के दायरे में आते हैं।
टेकआर्क ने अपने शोध में भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, केन्या, बांग्लादेश, फिलीपींस, वियतनाम और तुर्की जैसे 8 कम और मध्यम आय वाले देशों की तुलना अमेरिका, यूएई, हांगकांग, कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे 6 अमीर देशों से की है। आंकड़ों के मुताबिक, कम आय वाले देशों में आईफोन डुओ की औसत कीमत 3,669 डॉलर है, जबकि ज्यादा आय वाले देशों में यह महज 2,248 डॉलर है। इसका सीधा मतलब है कि कम क्रय शक्ति होने के बावजूद विकासशील देशों के लोग इस डिवाइस के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।
यह भी पढ़ें: क्या आईफोन 18 प्रो की सेल से पहले सस्ता हो गया आईफोन 17 प्रो और 17 प्रो मैक्स? जानें क्या है ऑफर
तुर्किये और फिलीपींस में सबसे महंगा
इस तुलनात्मक अध्ययन में तुर्किये सबसे महंगे बाजार के रूप में उभरा है, जहां आईफोन डुओ की कीमत 4,741 डॉलर है। इसके बाद फिलीपींस का नंबर आता है, जहां यह 4,519 डॉलर में बिक रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किये में स्थानीय मुद्रा में भारी गिरावट और आयातित या लग्जरी इलेक्ट्रॉनिक्स पर लगने वाले भारी टैक्स के कारण कीमतें इतनी ज्यादा हैं। वहीं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश इस सूची में लगभग 2,950 डॉलर से लेकर 3,590 डॉलर के दायरे में आते हैं।
अमेरिका में सबसे सस्ता है आईफोन डुओ
- फोटो : एपल
अमेरिका में सबसे सस्ता है आईफोन डुओ
दूसरी ओर, अमेरिका में आईफोन डुओ की कीमत सबसे कम यानी सिर्फ 1,999 डॉलर है। टेकआर्क के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका एपल का घरेलू बाजार है, इसलिए वहां कोई आयात शुल्क नहीं लगता। इसके साथ ही डॉलर की मजबूती भी कीमतों को कम रखने में मदद करती है। अमीर देशों में कीमतें लगभग एक समान हैं, लेकिन कम आय वाले देशों में आयात शुल्क, स्थानीय कर और मुद्रा की कमजोरी के कारण कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: आईफोन डुओ बनाम गैलेक्सी जेड फोल्ड 8: क्या एपल तोड़ पाएगा सैमसंग की बादशाहत, कौन जीतेगा फोल्डेबल फोन की जंग?
भारत में महंगा क्यों बिक रहा आईफोन डुओ?
भारत में आईफोन डुओ (iPhone Duo) की कीमत अधिक होने का मुख्य कारण भारी टैक्स, आयात शुल्क और कंपनी का मुनाफा है:
आयात शुल्क: आईफोन डुओ को फिलहाल भारत में नहीं बनाया जा रहा है। इसे पूरी तरह तैयार हालत में बाहर से मंगाया जाता है, जिस पर लगभग 15% कस्टम ड्यूटी और अन्य सरचार्ज कीमत को बढ़ा देते हैं।
जीएसटी: भारत में स्मार्टफोन पर 18% जीएसटी लगता है। यह टैक्स फोन के बेस प्राइस में जुड़कर कीमत को और बढ़ा देता है।
कंपनी का मार्जिन और जोखिम: रुपये और डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए कंपनी अपना अतिरिक्त मार्जिन और बफर जोड़ती है।
स्टेटस सिंबल: भारत में आईफोन को लग्जरी और रुतबे की निशानी माना जाता है। इसी प्रीमियम डिमांड का फायदा उठाकर कंपनियां ऊंची कीमत तय करती हैं।
यह भी पढ़ें: आईफोन 18 प्रो बनाम 18 प्रो मैक्स: किसका कैमरा बेहतर, बैटरी बैकअप में कौन आगे? प्री-ऑर्डर करने से पहले जान लें
दूसरी ओर, अमेरिका में आईफोन डुओ की कीमत सबसे कम यानी सिर्फ 1,999 डॉलर है। टेकआर्क के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका एपल का घरेलू बाजार है, इसलिए वहां कोई आयात शुल्क नहीं लगता। इसके साथ ही डॉलर की मजबूती भी कीमतों को कम रखने में मदद करती है। अमीर देशों में कीमतें लगभग एक समान हैं, लेकिन कम आय वाले देशों में आयात शुल्क, स्थानीय कर और मुद्रा की कमजोरी के कारण कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: आईफोन डुओ बनाम गैलेक्सी जेड फोल्ड 8: क्या एपल तोड़ पाएगा सैमसंग की बादशाहत, कौन जीतेगा फोल्डेबल फोन की जंग?
भारत में महंगा क्यों बिक रहा आईफोन डुओ?
भारत में आईफोन डुओ (iPhone Duo) की कीमत अधिक होने का मुख्य कारण भारी टैक्स, आयात शुल्क और कंपनी का मुनाफा है:
आयात शुल्क: आईफोन डुओ को फिलहाल भारत में नहीं बनाया जा रहा है। इसे पूरी तरह तैयार हालत में बाहर से मंगाया जाता है, जिस पर लगभग 15% कस्टम ड्यूटी और अन्य सरचार्ज कीमत को बढ़ा देते हैं।
जीएसटी: भारत में स्मार्टफोन पर 18% जीएसटी लगता है। यह टैक्स फोन के बेस प्राइस में जुड़कर कीमत को और बढ़ा देता है।
कंपनी का मार्जिन और जोखिम: रुपये और डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए कंपनी अपना अतिरिक्त मार्जिन और बफर जोड़ती है।
स्टेटस सिंबल: भारत में आईफोन को लग्जरी और रुतबे की निशानी माना जाता है। इसी प्रीमियम डिमांड का फायदा उठाकर कंपनियां ऊंची कीमत तय करती हैं।
यह भी पढ़ें: आईफोन 18 प्रो बनाम 18 प्रो मैक्स: किसका कैमरा बेहतर, बैटरी बैकअप में कौन आगे? प्री-ऑर्डर करने से पहले जान लें
विज्ञापन
विज्ञापन
केवल प्रीमियम ग्राहकों को आकर्षित करना लक्ष्य।
- फोटो : एपल
एपल की सोची-समझी रणनीति भी वजह
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि इस भारी कीमत के पीछे एपल की एक खास रणनीति छिपी हो सकती है। कंपनी जानती है कि कम आय वाले देश आईफोन डुओ के लिए मुख्य बाजार नहीं हैं। इसलिए वह केवल उन बेहद खास और अमीर ग्राहकों को लक्ष्य कर रही है जो प्रीमियम कीमत चुकाने को तैयार हैं। यह रणनीति आईफोन डुओ को सैमसंग जैसे ब्रांड्स के मुड़ने वाले स्मार्टफोन्स से बिल्कुल अलग और अधिक प्रीमियम दर्जे पर स्थापित करती है।
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि इस भारी कीमत के पीछे एपल की एक खास रणनीति छिपी हो सकती है। कंपनी जानती है कि कम आय वाले देश आईफोन डुओ के लिए मुख्य बाजार नहीं हैं। इसलिए वह केवल उन बेहद खास और अमीर ग्राहकों को लक्ष्य कर रही है जो प्रीमियम कीमत चुकाने को तैयार हैं। यह रणनीति आईफोन डुओ को सैमसंग जैसे ब्रांड्स के मुड़ने वाले स्मार्टफोन्स से बिल्कुल अलग और अधिक प्रीमियम दर्जे पर स्थापित करती है।