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PNG: पाइपलाइन से सीधे किचन तक कैसे पहुंचती है PNG गैस? जानिए पूरा सिस्टम और इसकी टेक्नोलॉजी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Fri, 27 Mar 2026 04:43 PM IST
सार
How PNG Gas Pipeline Works: एलपीजी सिलेंडर की झंझट के बीच पीएनजी गैस लोगों के लिए आसान और भरोसेमंद विकल्प बन रही है। लेकिन यह गैस जमीन के नीचे से निकलकर आखिर आपके किचन तक कैसे पहुंचती है, इसका पूरा सिस्टम समझना जरूरी है।
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आपके घर तक कैसे पहुंचता है पीएनजी?
- फोटो : एआई जनरेटेड
देश में बढ़ती एलपीजी कीमतों, सिलेंडर बुकिंग की झंझट और डिलीवरी के इंतजार के बीच अब लोग तेजी से पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की ओर रुख कर रहे हैं। बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक इसका नेटवर्क फैल रहा है और लाखों घरों में बिना सिलेंडर के सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंच रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह गैस आखिर आपके किचन तक कैसे पहुंचती है? इसके पीछे एक लंबी और बेहद आधुनिक प्रक्रिया काम करती है, जिसमें कई चरणों से गुजरते हुए गैस सुरक्षित तरीके से आपके घर तक पहुंचती है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
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क्या होती है पीएनजी गैस?
- फोटो : Adobe Stock
क्या होती है पीएनजी गैस?
पीएनजी (PNG) यानी पाइप्ड नेचुरल गैस एक प्राकृतिक ईंधन है, जो मुख्य रूप से मीथेन गैस से बनी होती है। यह साफ, कम प्रदूषण फैलाने वाली और एलपीजी के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। इसका इस्तेमाल घरों में खाना बनाने के साथ-साथ पानी गर्म करने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए भी किया जाता है।
पीएनजी (PNG) यानी पाइप्ड नेचुरल गैस एक प्राकृतिक ईंधन है, जो मुख्य रूप से मीथेन गैस से बनी होती है। यह साफ, कम प्रदूषण फैलाने वाली और एलपीजी के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। इसका इस्तेमाल घरों में खाना बनाने के साथ-साथ पानी गर्म करने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए भी किया जाता है।
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जमीन के नीचे से शुरू होता है सफर
- फोटो : FreePik
जमीन के नीचे से शुरू होता है सफर
इस गैस का सफर प्राकृतिक गैस के भंडार से शुरू होता है, जो जमीन के नीचे गहराई में मौजूद होते हैं। यहां से गैस को ड्रिलिंग के जरिए निकाला जाता है। शुरुआती रूप में यह गैस पूरी तरह शुद्ध नहीं होती, इसलिए इसे आगे प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाता है। गैस को बड़े प्रोसेसिंग प्लांट्स में ले जाकर उसमें मौजूद अशुद्धियां जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और अन्य गैसों को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद गैस उपयोग के लिए सुरक्षित और शुद्ध बन जाती है।
शुद्ध गैस को हाई-प्रेशर पाइपलाइनों के जरिए अलग-अलग राज्यों और शहरों तक पहुंचाया जाता है। ये पाइपलाइन जमीन के नीचे बिछी होती हैं और इन पर लगातार निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी तरह की तकनीकी समस्या को समय रहते ठीक किया जा सके।
इस गैस का सफर प्राकृतिक गैस के भंडार से शुरू होता है, जो जमीन के नीचे गहराई में मौजूद होते हैं। यहां से गैस को ड्रिलिंग के जरिए निकाला जाता है। शुरुआती रूप में यह गैस पूरी तरह शुद्ध नहीं होती, इसलिए इसे आगे प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाता है। गैस को बड़े प्रोसेसिंग प्लांट्स में ले जाकर उसमें मौजूद अशुद्धियां जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और अन्य गैसों को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद गैस उपयोग के लिए सुरक्षित और शुद्ध बन जाती है।
शुद्ध गैस को हाई-प्रेशर पाइपलाइनों के जरिए अलग-अलग राज्यों और शहरों तक पहुंचाया जाता है। ये पाइपलाइन जमीन के नीचे बिछी होती हैं और इन पर लगातार निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी तरह की तकनीकी समस्या को समय रहते ठीक किया जा सके।
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का काम
- फोटो : Adobe stock
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का काम
जब गैस शहर में पहुंचती है, तो इसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क में ट्रांसफर किया जाता है। यहां गैस का दबाव कम किया जाता है और फिर इसे छोटे पाइप नेटवर्क के जरिए अलग-अलग इलाकों, कॉलोनियों और सोसाइटी तक भेजा जाता है। हर घर में एक अलग पाइपलाइन कनेक्शन दिया जाता है, जिसमें गैस मीटर लगाया जाता है। यह मीटर इस्तेमाल की गई गैस को रिकॉर्ड करता है। इसके बाद गैस सीधे आपके किचन तक पहुंचती है और चूल्हे से कनेक्ट हो जाती है। प्राकृतिक गैस (नैचुरल गैस) असल में गंधहीन होती है। सुरक्षा के लिहाज से यहां इसमें मरकैप्टन नाम का एक केमिकल मिलाया जाता है, जिसकी तेज गंध से लीकेज का तुरंत पता चल जाता है।
जब गैस शहर में पहुंचती है, तो इसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क में ट्रांसफर किया जाता है। यहां गैस का दबाव कम किया जाता है और फिर इसे छोटे पाइप नेटवर्क के जरिए अलग-अलग इलाकों, कॉलोनियों और सोसाइटी तक भेजा जाता है। हर घर में एक अलग पाइपलाइन कनेक्शन दिया जाता है, जिसमें गैस मीटर लगाया जाता है। यह मीटर इस्तेमाल की गई गैस को रिकॉर्ड करता है। इसके बाद गैस सीधे आपके किचन तक पहुंचती है और चूल्हे से कनेक्ट हो जाती है। प्राकृतिक गैस (नैचुरल गैस) असल में गंधहीन होती है। सुरक्षा के लिहाज से यहां इसमें मरकैप्टन नाम का एक केमिकल मिलाया जाता है, जिसकी तेज गंध से लीकेज का तुरंत पता चल जाता है।
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सर्विस पाइप और मीटरिंग
- फोटो : Adobe stock
सर्विस पाइप और मीटरिंग
अंत में, गैस एक सर्विस पाइप के जरिए आपके घर की दीवार तक पहुंचती है। घर की बाहरी दीवारों पर लोहे के पाइप लगाए जाते हैं ताकि उन्हें बाहरी नुकसान से बचाया जा सके। इसके अलावा आपके घर में एक मीटर लगाया जाता है जो यह रिकॉर्ड करता है कि आपने कितनी गैस इस्तेमाल की है। आप जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना ही बिल आएगा। मीटर के बाद एक पतली और लचीली कॉपर (तांबे) की ट्यूब के जरिए गैस सीधे आपके गैस चूल्हे तक पहुंचती है। चूल्हे के पास एक अप्लायंस वाल्व होता है, जिसे बंद करने पर गैस की सप्लाई रुक जाती है।
अंत में, गैस एक सर्विस पाइप के जरिए आपके घर की दीवार तक पहुंचती है। घर की बाहरी दीवारों पर लोहे के पाइप लगाए जाते हैं ताकि उन्हें बाहरी नुकसान से बचाया जा सके। इसके अलावा आपके घर में एक मीटर लगाया जाता है जो यह रिकॉर्ड करता है कि आपने कितनी गैस इस्तेमाल की है। आप जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना ही बिल आएगा। मीटर के बाद एक पतली और लचीली कॉपर (तांबे) की ट्यूब के जरिए गैस सीधे आपके गैस चूल्हे तक पहुंचती है। चूल्हे के पास एक अप्लायंस वाल्व होता है, जिसे बंद करने पर गैस की सप्लाई रुक जाती है।