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Drone Rules: ड्रोन उड़ाने से पहले हो जाएं सावधान! लग सकता है 1 लाख का जुर्माना, जानिए क्या हैं 'ड्रोन रूल्स'
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Fri, 27 Mar 2026 05:32 PM IST
सार
Drone Flying Rules India: ड्रोन का इस्तेमाल आज फोटोग्राफी, डिलीवरी और निगरानी जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन भारत में इसे उड़ाने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। इन नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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ड्रोन (प्रतीकात्मक)
- फोटो : एएनआई / रॉयटर्स
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है। चाहे शादियों में फोटोग्राफी हो, खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव या फिर ई-कॉमर्स डिलीवरी, ड्रोन अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। लेकिन, आसमान में उड़ता हर ड्रोन अपनी मर्जी से नहीं उड़ सकता। भारत सरकार ने इसके लिए कुछ नियम बनाए हैं जिनका पालन ड्रोन उड़ाने वालों को करना पड़ता है।
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भारत में क्या हैं ड्रोन के नियम?
- फोटो : संवाद
भारत में क्या हैं ड्रोन उड़ाने के नियम?
भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) नियंत्रित करता है और इसके लिए ड्रोन नियम 2021 लागू हैं। इन नियमों के तहत किसी भी ड्रोन को उड़ाने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। हर ड्रोन को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जाता है और ऑपरेटर को डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराना होता है। इससे ड्रोन की निगरानी और ट्रैकिंग आसान हो जाती है।
भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) नियंत्रित करता है और इसके लिए ड्रोन नियम 2021 लागू हैं। इन नियमों के तहत किसी भी ड्रोन को उड़ाने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। हर ड्रोन को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जाता है और ऑपरेटर को डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराना होता है। इससे ड्रोन की निगरानी और ट्रैकिंग आसान हो जाती है।
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ड्रोन
- फोटो : istock
ड्रोन की कैटेगरी के मुताबिक मिलती है उड़ान की अनुमति
भारत में ड्रोन को उनके वजन (Weight) के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा गया है। सबसे छोटा नैनो ड्रोन (250 ग्राम से कम) होता है, जिसके लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। इसके बाद माइक्रो (250 ग्राम से 2 किलो), स्मॉल (2 किलो से 25 किलो), मीडियम (25 किलो से 150 किलो) और लार्ज ड्रोन (150 किलो से अधिक) आते हैं। नैनो को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों के लिए पंजीकरण और विशिष्ट पहचान संख्या (UIN) अनिवार्य है।
भारत में ड्रोन को उनके वजन (Weight) के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा गया है। सबसे छोटा नैनो ड्रोन (250 ग्राम से कम) होता है, जिसके लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। इसके बाद माइक्रो (250 ग्राम से 2 किलो), स्मॉल (2 किलो से 25 किलो), मीडियम (25 किलो से 150 किलो) और लार्ज ड्रोन (150 किलो से अधिक) आते हैं। नैनो को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों के लिए पंजीकरण और विशिष्ट पहचान संख्या (UIN) अनिवार्य है।
किन जगहों पर उड़ा सकते हैं ड्रोन और कहां नहीं?
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किन जगहों पर उड़ा सकते हैं ड्रोन और कहां नहीं?
देश में कई संवेदनशील स्थान ऐसे हैं जहां ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं है। इनमें एयरपोर्ट के आसपास का इलाका, सैन्य ठिकाने, सीमा क्षेत्र, सरकारी भवन और वीआईपी जोन शामिल हैं। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन उड़ाने से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे लोगों की सुरक्षा और गोपनीयता पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, ड्रोन उड़ाने के लिए ऑपरेटर को DGCA के डिजिटल स्काई (Digital Sky) प्लेटफॉर्म पर नजर डालनी होती है। सरकार ने पूरे भारतीय हवाई क्षेत्र को तीन रंगों के जोन में बांटा है:
ग्रीन जोन: यह वह इलाका है जहाँ 400 फीट की ऊंचाई तक ड्रोन उड़ाने के लिए किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
येलो जोन: यह नियंत्रित हवाई क्षेत्र है। यहाँ ड्रोन उड़ाने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से अनुमति लेनी पड़ती है। आमतौर पर हवाई अड्डों के आसपास का इलाका इसमें आता है।
रेड जोन: यह 'नो-फ्लाई जोन' है। यहाँ ड्रोन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसमें सैन्य ठिकाने, महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें और अंतरराष्ट्रीय सीमाएं शामिल हैं।
देश में कई संवेदनशील स्थान ऐसे हैं जहां ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं है। इनमें एयरपोर्ट के आसपास का इलाका, सैन्य ठिकाने, सीमा क्षेत्र, सरकारी भवन और वीआईपी जोन शामिल हैं। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन उड़ाने से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे लोगों की सुरक्षा और गोपनीयता पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, ड्रोन उड़ाने के लिए ऑपरेटर को DGCA के डिजिटल स्काई (Digital Sky) प्लेटफॉर्म पर नजर डालनी होती है। सरकार ने पूरे भारतीय हवाई क्षेत्र को तीन रंगों के जोन में बांटा है:
ग्रीन जोन: यह वह इलाका है जहाँ 400 फीट की ऊंचाई तक ड्रोन उड़ाने के लिए किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
येलो जोन: यह नियंत्रित हवाई क्षेत्र है। यहाँ ड्रोन उड़ाने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से अनुमति लेनी पड़ती है। आमतौर पर हवाई अड्डों के आसपास का इलाका इसमें आता है।
रेड जोन: यह 'नो-फ्लाई जोन' है। यहाँ ड्रोन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसमें सैन्य ठिकाने, महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें और अंतरराष्ट्रीय सीमाएं शामिल हैं।
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किन बातों का ध्यान रखें?
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उड़ान के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
ड्रोन उड़ाते समय यह जरूरी है कि उसे हमेशा अपनी नजर के दायरे में रखा जाए। तय सीमा से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भरना नियमों के खिलाफ है। रात के समय ड्रोन उड़ाने के लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ती है। साथ ही किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में दखल देना भी कानूनन गलत माना जाता है। इन नियमों का मकसद सिर्फ सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ड्रोन उड़ाते समय यह जरूरी है कि उसे हमेशा अपनी नजर के दायरे में रखा जाए। तय सीमा से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भरना नियमों के खिलाफ है। रात के समय ड्रोन उड़ाने के लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ती है। साथ ही किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में दखल देना भी कानूनन गलत माना जाता है। इन नियमों का मकसद सिर्फ सुरक्षा सुनिश्चित करना है।