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AGR बकाया पर सख्ती: एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज को 31 मार्च तक चुकाने होंगे ₹10,000 करोड़
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Tue, 31 Mar 2026 08:06 AM IST
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सार
AGR Dues: टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर बकाया को लेकर दबाव बढ़ गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि एयरटेल और टाटा टेलीसर्विस को 31 मार्च 2026 तक करीब ₹10,000 करोड़ का भुगतान करना होगा, नहीं तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना मानी जाएगी।
टेलीकॉम
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
टेलीकॉम सेक्टर में एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Airtel और Tata Teleservices को 31 मार्च 2026 तक कुल करीब ₹10,000 करोड़ का भुगतान करना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, Airtel पर ₹5,000 करोड़ से ज्यादा का बकाया है, जबकि Tata Teleservices को लगभग ₹4,000 करोड़ चुकाने हैं। सरकार की ओर से साफ संकेत है कि तय समय सीमा तक भुगतान नहीं करने पर इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि Airtel ने हाल ही में एक बार फिर सरकार से राहत की मांग की थी। कंपनी का कहना है कि अगर उसे भी राहत मिलती है तो टेलीकॉम सेक्टर में सभी कंपनियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित होगा। हालांकि सरकार ने अपने पुराने रुख को बरकरार रखा है और फिलहाल Airtel को किसी तरह की अतिरिक्त राहत देने से इनकार कर दिया है।
दरअसल, Vodafone Idea (Vi) को जो राहत मिली थी, वह सीधे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दी गई थी। Airtel और Tata Teleservices के मामले में ऐसा कोई आदेश नहीं आया है, इसलिए इन कंपनियों को समय पर पूरा भुगतान करना होगा।
जानकारों के मुताबिक, Airtel के पास बकाया चुकाने की क्षमता और कैश फ्लो दोनों मौजूद हैं, लेकिन कंपनी चाहती है कि उसे भी समान शर्तों पर राहत मिले। फिलहाल सभी की नजर 31 मार्च की डेडलाइन पर टिकी हुई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, Airtel पर ₹5,000 करोड़ से ज्यादा का बकाया है, जबकि Tata Teleservices को लगभग ₹4,000 करोड़ चुकाने हैं। सरकार की ओर से साफ संकेत है कि तय समय सीमा तक भुगतान नहीं करने पर इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।
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दिलचस्प बात यह है कि Airtel ने हाल ही में एक बार फिर सरकार से राहत की मांग की थी। कंपनी का कहना है कि अगर उसे भी राहत मिलती है तो टेलीकॉम सेक्टर में सभी कंपनियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित होगा। हालांकि सरकार ने अपने पुराने रुख को बरकरार रखा है और फिलहाल Airtel को किसी तरह की अतिरिक्त राहत देने से इनकार कर दिया है।
दरअसल, Vodafone Idea (Vi) को जो राहत मिली थी, वह सीधे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दी गई थी। Airtel और Tata Teleservices के मामले में ऐसा कोई आदेश नहीं आया है, इसलिए इन कंपनियों को समय पर पूरा भुगतान करना होगा।
जानकारों के मुताबिक, Airtel के पास बकाया चुकाने की क्षमता और कैश फ्लो दोनों मौजूद हैं, लेकिन कंपनी चाहती है कि उसे भी समान शर्तों पर राहत मिले। फिलहाल सभी की नजर 31 मार्च की डेडलाइन पर टिकी हुई है।
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