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Satellite: पुल के गिरने से पहले ही मिल जाएगा अलर्ट! सैटेलाइट करेंगे रखवाली, जानें कैसे काम करेगी यह तकनीक
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 30 Mar 2026 05:58 PM IST
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सार
SAR Technology: अमेरिका के वैज्ञानिकों ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिससे सैटेलाइट्स पुलों की कमजोरी पहले ही पकड़ लेंगे। इससे हादसों को टाला जा सकेगा और समय रहते मरम्मत संभव होगी।
पुल के टूटने से पहले मिल जाएगा अलर्ट
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
अब पुल गिरने का खतरा पहले ही पता चल सकेगा। अमेरिका में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आधुनिक तकनीक तैयार की है, जिससे सैटेलाइट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सा पुल कमजोर हो रहा है और कब खतरे में आ सकता है। ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को विकसित किया है। उनका दावा है कि सैटेलाइट्स पुलों से आने वाले शुरुआती “वॉर्निंग सिग्नल” को पहचान सकते हैं। इससे बड़े हादसों से पहले ही सतर्कता बरती जा सकेगी।
744 पुलों पर हुई टेस्टिंग
वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च के दौरान दुनिया भर के 744 प्रमुख पुलों का बारीकी से अध्ययन किया। इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिसर्च के मुताबिक, नॉर्थ अमेरिका और अफ्रीका के पुलों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है और वहां मरम्मत की तत्काल जरूरत है।
क्या है SAR तकनीक?
इस पूरी प्रक्रिया में 'सिंथेटिक अपर्चर रडार' (SAR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक इतनी सटीक है कि जमीन में होने वाले मामूली बदलावों, जैसे भूस्खलन या मिट्टी धंसने के कारण पुल में आने वाले महज कुछ मिलीमीटर के झुकाव को भी माप सकती है। यह तकनीक दिन हो या रात, या फिर घने बादल, हर मौसम में काम करने में सक्षम है।
यह भी पढ़ें: Jio के इस एक रिचार्ज में कट जाएगा IPL 2026: फ्री में मिलेगा Jio Hotstar का सब्सक्रिप्शन, अनलिमिटेड 5G डेटा
खर्च और समय दोनों की बचत
जहां मौके पर जाकर जांच करना मुश्किल होता है, वहां यह तकनीक काफी मददगार साबित हो सकती है। सैटेलाइट के जरिए दूर बैठकर ही पुलों की निगरानी की जा सकेगी। इससे रखरखाव का खर्च कम होगा और समय पर मरम्मत भी संभव होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तकनीक से हाई-रिस्क पुलों की पहचान में करीब 33% तक सुधार हो सकता है। वहीं, पारंपरिक सेंसर सिस्टम महंगे होते हैं, लेकिन सैटेलाइट की मदद से 60% से ज्यादा लंबे पुलों की नियमित निगरानी की जा सकती है।
भविष्य में बड़ा बदलाव
यह तकनीक आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अगर इसे बड़े स्तर पर लागू किया गया, तो पुल हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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744 पुलों पर हुई टेस्टिंग
वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च के दौरान दुनिया भर के 744 प्रमुख पुलों का बारीकी से अध्ययन किया। इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिसर्च के मुताबिक, नॉर्थ अमेरिका और अफ्रीका के पुलों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है और वहां मरम्मत की तत्काल जरूरत है।
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क्या है SAR तकनीक?
इस पूरी प्रक्रिया में 'सिंथेटिक अपर्चर रडार' (SAR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक इतनी सटीक है कि जमीन में होने वाले मामूली बदलावों, जैसे भूस्खलन या मिट्टी धंसने के कारण पुल में आने वाले महज कुछ मिलीमीटर के झुकाव को भी माप सकती है। यह तकनीक दिन हो या रात, या फिर घने बादल, हर मौसम में काम करने में सक्षम है।
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खर्च और समय दोनों की बचत
जहां मौके पर जाकर जांच करना मुश्किल होता है, वहां यह तकनीक काफी मददगार साबित हो सकती है। सैटेलाइट के जरिए दूर बैठकर ही पुलों की निगरानी की जा सकेगी। इससे रखरखाव का खर्च कम होगा और समय पर मरम्मत भी संभव होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तकनीक से हाई-रिस्क पुलों की पहचान में करीब 33% तक सुधार हो सकता है। वहीं, पारंपरिक सेंसर सिस्टम महंगे होते हैं, लेकिन सैटेलाइट की मदद से 60% से ज्यादा लंबे पुलों की नियमित निगरानी की जा सकती है।
भविष्य में बड़ा बदलाव
यह तकनीक आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अगर इसे बड़े स्तर पर लागू किया गया, तो पुल हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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