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Meta के खिलाफ कोर्ट पहुंचे कर्मचारी: आरोप- नौकरी से निकालने के लिए AI से की मॉनिटरिंग, नहीं ली सहमति
Sun, 19 Jul 2026 03:22 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 19 Jul 2026 03:22 PM IST
सार
क्या अब नौकरी जाने का फैसला इंसान नहीं बल्कि AI करेगा? Meta के 26 कर्मचारियों ने कंपनी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। आरोप है कि AI सिस्टम ने मेडिकल, मैटरनिटी और फैमिली लीव पर रहे कर्मचारियों को कम रेटिंग देकर छंटनी की सूची में शामिल कर दिया। हालांकि Meta ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
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मेटा के खिलाफ कोर्ट गए कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)
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फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला बड़े पैमाने पर हुई कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ा है। कंपनी के 26 कर्मचारियों ने मेटा के खिलाफ कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया है कि कंपनी ने लोगों को नौकरी से निकालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया।
AI ने तय किया किसे निकालना है
- फोटो : एआई जनरेटेड
'मैनेजर नहीं, AI ने तय किया किसे निकालना है'
- सोमवार को कैलिफोर्निया के उत्तरी जिले की फेडरल कोर्ट में दाखिल 71 पन्नों की शिकायत में कहा गया है कि Meta ने इस साल की शुरुआत में करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी के दौरान पारंपरिक मैनेजरों की राय पर भरोसा करने के बजाय कई इंटरनल AI सिस्टम का सहारा लिया।
- याचिका के मुताबिक, AI ने कर्मचारियों की परफॉर्मेंस रेटिंग, कीस्ट्रोक, कंप्यूटर एक्टिविटी और अन्य प्रोडक्टिविटी डेटा के आधार पर स्कोर तैयार किए। इसी स्कोर के आधार पर यह तय किया गया कि किन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा।
छुट्टी पर रहने वालों को हुआ नुकसान
- फोटो : एआई जनरेटेड
छुट्टी पर रहने वालों को हुआ नुकसान
- मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि जब कोई कर्मचारी मेडिकल, मैटरनिटी या फैमिली लीव पर होता है, तब उसके काम से जुड़े डेटा और एक्टिविटी स्वाभाविक रूप से कम हो जाते हैं। ऐसे में AI सिस्टम ने उन्हें कम स्कोर दिया और यही उनके खिलाफ चला गया।
- शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे उन कर्मचारियों को नुकसान हुआ जिन्होंने कानूनी रूप से मिलने वाली छुट्टियों का इस्तेमाल किया था।
- याचिका में कई मामलों का जिक्र किया गया है। एक महिला वैज्ञानिक को बच्चे के जन्म से सिर्फ दो दिन पहले, जब वह अप्रूव्ड प्रेग्नेंसी लीव पर थीं, उन्हें छंटनी का नोटिस मिला।
- एक इंजीनियर ने आरोप लगाया कि चोट के कारण छुट्टी लेने से उनकी परफॉर्मेंस रेटिंग गिरा दी गई। वहीं, एक मैनेजर ने दावा किया कि मेडिकल लीव शुरू होने के सिर्फ 16 दिन बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
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Meta ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
- फोटो : ANI
Meta ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
- इन आरोपों पर Meta ने साफ इनकार किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि मुकदमे में लगाए गए दावों का तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। कंपनी के अनुसार, वर्कफोर्स मैनेजमेंट और कर्मचारियों से जुड़े सभी फैसले इंसानों ने लिए हैं, AI ने नहीं।
- Meta ने इस साल की शुरुआत में एक AI आधारित इमप्लॉई मॉनिटरिंग प्रोग्राम शुरू किया था। इसका उद्देश्य कंपनी के डिवाइस इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों की गतिविधियों का विश्लेषण करना था। इस सिस्टम के जरिए कर्मचारियों के कीस्ट्रोक, माउस मूवमेंट, ब्राउजर हिस्ट्री, मैसेज, ईमेल और लोकेशन डेटा जैसी जानकारियां रिकॉर्ड की जाती थीं।
- Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने पहले कहा था कि इसका मकसद AI मॉडल को कर्मचारियों के वास्तविक कामकाज के तरीके से ट्रेन करना है, ताकि भविष्य में AI बेहतर निर्णय ले सके।
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बिना सहमति निगरानी का भी आरोप
- फोटो : Freepik
बिना सहमति निगरानी का भी आरोप
- मुकदमे में यह भी दावा किया गया है कि Meta ने कर्मचारियों की स्पष्ट सहमति लिए बिना यह मॉनिटरिंग सिस्टम लागू कर दिया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इसकी जानकारी केवल एक कम प्रमुख इंटरनल पोस्ट के जरिए साझा की गई थी, जिसे किसी वरिष्ठ अधिकारी के बजाय एक इंजीनियर ने प्रकाशित किया था।
- कर्मचारियों का आरोप है कि शुरुआत में उन्हें न तो कोई सहमति देने का विकल्प मिला और न ही इस सिस्टम से बाहर निकलने का कोई तरीका उपलब्ध कराया गया।
- AI आधारित फैसलों को लेकर यह मामला अब कार्यस्थल पर प्राइवेसी, पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी नई बहस को जन्म दे सकता है।